कोटा के तरणताल में आज बहुत चहल पहल हो रही थी।राज्यभर के सारे ज़िले के खिलाड़ी आए हुए थे।एक लंबे समय के बाद जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा था । सभी प्रतिभागियों को सामने ही बने स्टेडियम के कमरों में रुकवाया गया था।
सब खिलाड़ी शाम को अपने अपने कोच के साथ पास ही बने उद्यान में सैर करने गये । कल सुबह प्रतियोगिता शुरू होना थी अतः तनाव स्वाभाविक था क्योंकि लंबे समय के बाद यह प्रतियोगिता हो रही थी । बूंदी ज़िले की टीम के खिलाड़ी बग़ीचे में सामने से आ रहे थे ।उन छात्रों को देख कर जयपुर के खिलाड़ियों ने उनकी वेशभूषा और बोल -चाल का मज़ाक़ उड़ाते हुए व्यंग्य करने लगे। बूंदी टीम के एक खिलाड़ी सर्वेश ने विनम्रतापूर्वक बोला भी “देखो भाइयों हम यहाँ स्वस्थ प्रतियोगिता के लिए आए हैं न कि एक दूसरे को नीचा दिखाने”, लेकिन जयपुर टीम के एक दो खिलाड़ी बोलने लगे “न कपड़े पहनने का ढंग है और न बोलने का ये गंवार हमसे क्या मुक़ाबला करेंगे,कल जब स्विमिंग पूल में मुँह की खाएंगे तब लेवल समझ में आ जाएगा” ।गरमागरमी देखकर दोनों टीम के कोच पास में आए ,उन्होंने अपने अपने खिलाड़ियों को समझाया और मामला शांत किया।
जयपुर टीम के कोच ने रात को खिलाड़ियों को स्विमिंग पुल के कुछ दाँव पेच बताते हुए कहा कि “आप लोग शुरू से ही स्पीड मैंटेन रखना, ओवर कॉन्फिडेंस में मत रहना ,तैराकी में ट्रिक्स के अलावा स्टेमिना का भी बहुत महत्व होता है । उस टीम के खिलाड़ियों को गाजर मूली मत समझना,वो वेशभूषा और बातचीत में भले ही साधारण से लग रहे हो और उनके लगातार अभ्यास को देखते हुए मैं उनके स्टेमिना को महसूस कर पा रहा हूँ”।जयपुर टीम के खिलाड़ियों ने कोच की बात को हवा में उड़ा दिया।
अगले दिन जब प्रतियोगिता शुरू हुई पहले राऊंड में जयपुर टीम आगे चल रही थी ।वे लोग शुरुआत में तो जोश में तैर रहे थे और धीरे धीरे हाँफने और थकने लगे जबकि बूंदी टीम के खिलाड़ी बड़े आराम से तैर रहे थे। आखिर बूंदी टीम कई पॉइंट्स से आगे निकलती हुई जीत गई। जयपुर टीम के छात्र शर्मिंदा हो रहे थे। वो समझ गए थे कि जब तक किसी के बारे में पूरी जानकारी न हो उसका मूल्य कम नहीं आंकना चाहिए।
विजय कुमार शर्मा
कोटा राजस्थान
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