कबाड़

 अम्मा अब तो यह अपना नया घर है सब नया सामान आयेगा ये सब पुराना फालतू कबाड़ वहीं किराए के मकान में छोड़ कर आना चाहिए था आप लोगों को.. उफ्फ ये कमरा है या कबाड़ रूम ..!!ऐसा करो शाम को ऑफिस से लौटते समय  कबाड़ी को लेता आऊंगा तब तक आप छांट लो....ये सब कबाड़ उसे दे देना .. विमल ने कहा और कमरे में फैले सामान को चिढ़ कर देखते हुए ऑफिस चला गया ।

मालिनी जी अपने पति की ओर देख कर चुप रह गईं।

ठीक है बेटा धीरे से कह अपने कमरे में रखे सारे सामान को ध्यान से देखने लगीं।

....ये पुरानी मेज ..याद है आपको....आप विमल के पढ़ने के लिए लाए थे जब वह कक्षा पांचवीं में पूरे स्कूल में प्रथम आया था  अपनी गाढ़ी कमाई से कितनी मुश्किल से रुपए जमा कर इसे खरीदा था....ये स्टोव गांव में मुझे चूल्हे  से बचाने के लिए आप लेकर लाए थे... और ...ये लंबी डंडी वाला काला छाता जिसने बरसों बरस पूरी शिद्दत से बारिश से बचाया आपको दफ्तर आते जाते ...मालिनी जी कपड़े में जतन से रखे छाते को छू कर अतीत की पोटलियां खोलने में मगन हो गईं ।

हां....और....ये तांत वाली कुर्सियां ....जिनमे हम दोनों ने बरामदे में बैठ ना जाने कितने सुख दुख बांटे हैं ....!!आनंद जी ने आगे बढ़ कर चादर में सम्भाल कर लपेटी कुर्सियों की बांह थाम एक और पोटली खोल दी थी..!

और ये आपकी हीरो होंडा ... मालिनी जी ने हंसकर दीवार से टिकी पुरानी पर साफ सुथरी साइकिल की सीट पकड़ कर कहा .. ना पेट्रोल का खर्चा ना बस का इंतजार .. कैरियर में टिफिन डिब्बा लेकर रोज आपको समय पर दफ्तर पहुंचाती थी...तो आनंद जी साइकिल पकड़ जाने कितनी बातें याद कर खिलखिला उठे।

अम्मा.. कबाड़ी के लिए समान छांट लिया ..!! कबाड़ी आया है.. विमल की तेज आवाज से दोनों चौंक गए पूरा दिन बीत गया शाम हो गई पुरानी मीठी स्मृतियों की गठरिया ऐसी खुली कि समय उड़ने लगा।

बेटा... यहां कबाड़ कहां है ...ये सब तो हमारे #गाढ़े दिन के साथी है सहयोगी हैं इनके साथ हमारी जिंदगी उतनी ही जुड़ी है जितनी तुम बच्चो के साथ....  अब तू ही बता क्या  छांटू..!और क्या कबाड़ी को दूं!!

कमरे के दरवाजे पर कबाड़ी के साथ खड़ा विमल अम्मा की  बात और कमरे में बिखरी स्मृतियों की पोटलियों से टकरा कर ठहर सा गया था...अम्मा पापा का ये जुड़ाव उसे भी  हर सामान से जोड़ने लगा था...!!


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