विमल एक फैक्ट्री में काम करता था और उसके आलस और कामचोरी की वजह से उसे नौकरी से निकाल दिया गया था ।घरमें उसकी माँ ,पत्नी शालू और बेटी नीलू थी।नौकरी छूटने के बाद विमल दिन भर दोस्तों के साथ घूमता रहता था।माँ की पेंशन से गृहस्थी की गाड़ी जैसे तैसे खींच रही थी ।माँ और शालू दोनों उसे कई बार दूसरा कोई काम ढूँढने के लिए कहते रहते पर उसके कान पर जूँ नहीं रेगती।
एक दिन तो माँ ने उसे डाँटते हुए यहाँ तक कह दिया थाकि “जिस दिन मैं नहीं रहूँगी रोटियो के लाले पड़ जाएँगे “पर वह तो चुपचाप सुन कर निकल गया।
अब तो वह सुबह से निकल जाता और देर रात आता।बेचारी शालू गुड़िया को स्कूल छोड़ने जाती। फिर घर के काम निपटातीऔर गुड़िया को लेने शाम को फिर जाती।
एक दिन शालू गुड़िया को स्कूल से ले वापस लौट रही थी तभी पड़ोसन का फोन आया शालू भाभी जल्दी आ जाओ माँ को हार्ट अटैक आ गया है।शालू ने ऑटो रिक्शा पकड़ा और तुरंत घर आ गई । पड़ोस वाले अंकल ने एम्बुलेंस को फोन कर बुला लिया था।विमल और उसके दोस्त भी अस्पताल पहुँच गये थे। डॉक्टर बोले मेजर अटैक आया है तुरंत ये इंजेक्शन ला कर लगाने होंगे तभी ये बच पायेंगी। आप जल्दी से इंजेक्शन ले आये।विमल के पास रुपये तो थे नहीं ,वह बहुत घबरा गया।उसने दोस्तों से रुपये माँगे तो सबने हाथ खड़े कर दिये। विमल को “दिन में तारे नजर आ रहे थे”।सामने से आती शालू और उसके पापा को देख कर वह बहुत ज़ोर से रो पड़ा। शालू ने उसे ढाढ़स बँधाते हुए कहा “हिम्मत से काम लो, मुझे सब पता था मैंने ही पापा को यहाँ बुलवाया था,इंजेक्शन का इंतज़ाम हो गया है, केमिस्ट अंकल पापा के दोस्त है,उन्होंने इंजेक्शन भिजवा दिए है और अब माँ की हालत में तेज़ी से सुधार हो रहा है”।
विमल तो शर्म से पानी पानी हुआ जा रहा था।आज उसे रोज़गार का महत्व समझ में आ गया था।
विजय कुमार शर्मा
कोटा राजस्थान
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