साहस का परिणाम

        अरे,अरे-ये तुम क्या कर रहे हो?तुम्हे जरा भी शर्म लिहाज नही है।भाग जाओ यहां से,नही तो तुम्हे पुलिस से पकड़वा दूंगा।यहां आस पास भी दीखाई भी मत देना।

      तू जानता नही मैं कौन हूँ,तभी इतना बोल रहा है। तेरी बहन लगती है क्या,फूट यहां से।

      अच्छा मैं बताता हूं तुझे कहते कहते सलिल ने उस शोहदे के एक झापड़ रसीद कर दिया।

        शोहदा और कोई नही इलाके के गुंडे गुल्लू का भाई शाहिद था।गुल्लू के डर से पूरे इलाके में उसके खिलाफ कोई बोलने की हिम्मत रखता नही था,पर सलिल ने उसके भाई को मुहल्ले की लड़की को छेड़ता देख  ललकार दिया और झापड़ तक मार दिया।शाहिद सलिल को देख लेने की धमकी देते हुए वहां से चला गया।

       हरिशंकर मास्टर जी का बेटा सलिल लखनऊ में मेडिकल स्टूडेंट था और छुटियों में अपने घर आया हुआ था।आज जब घर के लिये सब्जी खरीदने निकला तो रास्ते मे उसने शाहिद को अपने ही मुहल्ले की लड़की को छेड़ता देखा तो उसका खून खौल गया।उससे यह सहन नही हुआ तो उसने शाहिद के झापड़ मार दिया।शाहिद को झापड़ मारने की बात पूरे मुहल्ले में आग की तरह फैल गयी।मुहल्ले वाले इस बात से तो खुश थे कि एक मर्द तो ऐसा निकला जिसने गुंडागर्दी को चुनौती दी,पर अंदर ही अंदर आशंकित थे कि अपने भाई के पिटने पर अब गुल्लू चुप नही बैठेगा,पता नही उसके इंतकाम की आग में कौन कौन झुलसेंगे।

यही कारण था मुहल्ले वाले सलिल की तारीफ तक भी नही कर पा रहे थे,कौन अंगारे सिर पर रखे।मास्टर जी एवं उनकी पत्नी को भी अपने बेटे का शाहिद से उलझने की जानकारी हो गयी थी।मास्टर जी इस बात से खुश थे कि उनके बेटे में साहस और संस्कार कूट कूट कर भरे हैं, उन्हें अपने बेटे पर गर्व था,पर उनकी पत्नी यानि सलिल की डरी हुई थी।जैसे ही सलिल घर आया तो उसकी माँ बदहवास सी हो उसको झिंझोड़ कर बोली सलिल तूने ये आफत क्यो मोल ले ली,अरे वे गुंडे हैं, पता नही बेटा वे अब क्या करेंगे,तुझे दूसरे के मामले में पड़ने की भला क्या जरूरत थी?सलिल बोला, माँ इन गुंडों की ताकत हमारा डर होती है।हम डरते हैं तो वे शेर रहते है,हम निडर हो जाये तो ये पास भी नही फटकेंगे।फिर तुम्ही बताओ उस लड़की की जगह मेरी अपनी बहन ही होती तो?माँ निरुत्तर हो गयी।तभी सलिल के पिता बोले तुमने बिल्कुल ठीक कह भी रहे हो बेटा और तुमने जो किया वह भी बिल्कुल ठीक किया।ऐसे गुंडों को उत्तर मिलना ही चाहिये। तुम्हारे इस कदम से उत्साहित होकर उस लड़की की ओर से उसके घरवालों ने शाहिद की पुलिस में रिपोर्ट भी लिखा दी है,तुम्हे गवाही में रखा है, पीछे मत हटना बेटा।पिता द्वारा दिये हौसले से अभिभूत सलिल ने अपने पिता के चरण स्पर्श कर लिये।

        संयोग वश थाने में नियुक्त नये इंस्पेक्टर गुल्लू की फिराक में तो था,पर उसके खिलाफ कोई रिपोर्ट ही नहीं लिखवा रहा था,गवाही की तो बात दूसरी थी।यह पहला अवसर था जब रिपोर्ट भी लिखी गयी थी और उसमें सलिल का नाम भी गवाही के रूप में था।इंस्पेक्टर ने मास्टर जी एवम सलिल को आश्वस्त कर दिया था कि वे निश्चिंत रहे,वे बदमाश उनका कुछ नही बिगाड़ पायेंगे, पुलिस उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान करेगी।

       रात्रि 8 बजे के लगभग गुल्लू मास्टर जी के घर आया।उसने मास्टर जी का अभिवादन करके कहा, मास्टर जी आप तो यही रहते ही है,आपका बेटा लखनऊ रहता है, इसे क्या जरूरत थी बीच मे पड़ने की,शाहिद को पुलिस ने पकड़ लिया है,मास्टर जी अपने बेटे को समझाओ कि वह थाने जाकर बोल दे कि उसने कुछ नही देखा।मेरा भाई छूट जायेगा।मास्टर जी ने साफ कह दिया कि उसके बेटे ने जो देखा है वह वही कहेगा।तुम जा सकते हो।अच्छा तो मास्टर तेरे भी पर निकल आये हैं, कतरने पड़ेंगे।यहाँ  बात न बनती देख गुल्लू ने लड़की के परिवार वालो को भी धमकाने की कोशिश की तो उन्होंने पुलिस को फोन कर दिया।गुल्लू वहां से एकदम रफूचक्कर हो गया।इसी बीच इंस्पेक्टर ने शाहिद के बालों पर उस्तरा फिरवा कर उसका जुलूस कस्बे में निकलवा दिया।इससे कस्बे वालो का गुल्लू से लगने वाला डर दूर हो गया।अब सब मुखर हो गये।

          इससे गुल्लू बौखला गया और उसने लड़की के घरवालों पर अपने साथियों के साथ हमला कर दिया।पुलिस को इस बात की पहले से आशंका थी,इसलिये इंस्पेक्टर ने पहले से ही चार सिपाही सादे लिवास में वहां तैनात कर रखे थे।सो उन्होंने गुल्लू को भी कब्जे में ले लिया।उसकी भी अच्छी तरह से थाने में खातिरदारी की गयी।पूरा कस्बा गुल्लू के खिलाफ एक जुट हो गया था।गुल्लू और उसके साथियों को जेल भेज दिया गया।एक सलिल द्वारा हिम्मत दिखायी गयी तो परिणाम था कस्बे ने भी एकता प्रदर्शित कर दी।

बालेश्वर गुप्ता,नोयडा

मौलिक एवं अप्रकाशित।


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