भाभी में छुपी मां

 सावन की रिमझिम को देखकर मायके से जुड़ी कई यादें सुधा की स्मृति में तैर गई ....मां से जुड़ी ,अपने घर आंगन से जुड़ी, मोहल्ले की सारी सखियों से जुड़ी, भाई बहनों से जुड़ी कई स्मृतियां याद आती है।

मां का अतुलित स्नेह,  मां का प्रेम किसी खजाने से कम नहीं होता .......मां हमेशा कहती "बेटियां मायके  आती है ,अपना बचपन दोबारा जीने के लिए "

मां खूब प्यार करती... दुलारती खूब खिलाती ,पिलाती और प्यार से सिर पर हाथ फेरती.... बहुत सारी मधुरी स्मृतियों को याद करते हुए सुधा की आंखों में आंसू तैर गए... क्योंकि पहले लाक डाउन में उसने  अपनी मां को खोया.... वह तो जा भी नहीं पाई ...लेकिन भाभी ने मां को अच्छी तरह से  चुंदड़ी पहनाकर विदा किया ...

इन दिनों अपनी भाभी के नए स्वरूप को देख कर मन में अच्छा लगता है.... भाभी अच्छी तो थी ही, पर जब से मां गई है तबसे भाभी में छुपी हुई मां बहुत नजर आ रही है.... मां के जाने के बाद बाबूजी को प्यार से संभालना, उनकी सेवा करना, आने जाने वालों का सत्कार करना, घर की जवाबदारी पूरे तन मन से  निभा रही है।

सुधा को लगता है ,अगर भाभी अच्छी हो तो मायका  कभी भी नहीं छूटता...

एक दिन जब भैया का फोन आया "जीजी बाबू जी की तबीयत ठीक नहीं है ,देखने आ जाओ, तब और वह और उसकी बहन आशा दोनों रात में उनके पास गई, सुधा का एक हाथ बहुत दुख रहा था... तब भाभी ने सब की हाजरी बजाते हुए भी उसके हाथों में रात में ही तीन चार बार आयोडेक्स लगाया ...और हाथ को आराम हो गया... सुधा को बार-बार एहसास हो रहा था यह हाथ तो मेरी मां के हाथ जैसा है....

सुधा एक ननंद भी है और अपनी नंनदों की भाभी भी है... उसकी भी सास नहीं है पर पूरी कोशिश करती है अपनी नंनदो पर प्यार लुटाने की.... राखी पर उन्हें  वह हमेशा बुलाती है... सोचती ...यह भाई बहनों का रिश्ता ईश्वर ने कितना प्यारा बनाया है ...जिस तरह से एक बहन अपने मायके के  संदेशे का रास्ता देखती है..। वैसे ही मेरी ननंद भी मेरे संदेशे की राह देख रही होगी..। और उसने अपनी प्यारी नंनद  को फोन लगाया... "राखी आने वाली है" आप कब आ रहे हो...

मेरी भाभी हर बार फोन पर पूछती है "दीदी कब आ रही हो? बस सुधा को लगता है ,मां नहीं है पर  भाभी में छुपी मां उसे प्यार से बुला रही है ....

सावन का कुछ अलग  एहसास उसके मन में है... सब सोचते हुए अपने भतीजे  के लिए उपहार, बाबूजी के लिए आंवले का मुरब्बा ,भाभी के लिए प्यारी सी चूड़ियां, इन सब की तैयारी करने लगी

- सुधा जैन

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