छाती पर सांप लोटना

  जैसे ही धापू बाई उठ के आंगन में गई तो चिल्ला पड़ी " है राम........!! यह क्या हो गया.....?  और जोर -जोर से रोने लगी उसकी दर्द भरी आवाज सुनकर  पति  मांगीलाल हड़बड़ा कर उठा आंगन में आकर देखा तो...! बैलों की जोड़ी में से एक बेल मर गया था, वह सुन्न पड़ गया फसल बुवाई का टाइम था, "अब क्या करूं..... क्या होगा......?

                     मांगीलाल ने गांव के साहूकार और सारे गांव वालों के आगे मदद की गुहार की पर कोई भी उसकी मदद करने को राजी ना हुआ l पत्नी के गहने भी पहले ही से गिरवी पड़े थे अब क्या करें....?

                     धापू बाई और मांगीलाल के एक  बहुत पुराने मित्र थे, कल्याण सिंह जो अब दूसरे गांव में रहते थे और बहुत ही संपन्न थे, जब यह बात उनके कानों तक पहुंची तो तुरंत आए और मांगीलाल से कहा "अभी मेरे साथ शहर चल.... नया ट्रैक्टर लेकर आते हैं, बुवाई लेट हो गई तो अनर्थ हो जाएगा....! पैसों की फिक्र मत कर आखिर मेरे बेटे को विदेश भेजने में भी तो तूने मेरी कितनी मदद की थी "

                   शहर से नया चमचमाता ट्रैक्टर आ गया समय पर बोवाई भी हो गई,  पूरे गांव में सबसे अच्छी फसल मांगीलाल की हुई  l धापू बाई के शानदार जेवर और कपड़े आ गए माँ लक्ष्मी की अपरा कृपा से घर धन धान से भर गया  और मांगीलाल ने कल्याण सिंह के सारे पैसे भी लौटा दिए l

                 पर यह सब गांव वालों को कहां हजम होने वाला था...!! ये मांगीलाल जो कल तक सबके सामने गिड़गिड़ा रहा था, आज इतना संपन्न हो गया यह सब देखकर सारे गांव वालों की छाती पर सांप लोट गया ऊपर ऊपर से तो सब बधाइयां दे रहे थे..,पर मन ही मन उन्हें बहुत जलन हो रही थी l


 मौलिक एवं स्वरचित


 रणजीत सिंह भाटिया ✍️


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