जिंदगी की सच्चाई

 अपने पति को खो  देने के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी कैसे निभाए निशा को समझ नही आ रहा था पति के सामने किसी बात की चिंता नहीं थी निशा की खुशियां देख ससुराल मैं सास और देवर  उस से बहुत जलते थे

आज खुशियों को नजर लग गई थी लेकिन उनकी जलन कम नहीं हुई उसने अपने देवर से कहा आप दुकान सम्हाल लो तो सास बोली अपनी जिम्मेदारी खुद ही उठाओ

निशा ने हिम्मत नही हारी अपने पति की  दुकान को चलाना शुरू किया और घर और बच्चों की जिम्मेदारी निभाती रही उसकी मेहनत देख बच्चे भी पूरे दिल से

आगे बढ़ रहे थे आज दोनों की अच्छी नौकरी लग गई थी दादी का मुंह मीठा कराने आए तो कहने लगी अब क्या

यहां मुझे जलाने आए हो जाओ यहां से

बच्चे बोले दादी हम तो आशीर्वाद लेने आए है मां ने कहा है की आपके बगैर हम इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते आप सहारा दे देती तो शायद मां कभी अपने पैरों पर नही खड़ी हो पाती और हम भी शायद यहां तक नही पहुंच पाते

दादी की छाती पर सांप लोटने लगे उनकी तरक्की देख कर


स्वरचित

अंजना ठाकुर


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