अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारना

 राधा ने अपनी मैम से सिफ़ारिश कर रंजन को ड्राइवर की नौकरी पे लगवाया । क्योंकि रंजन को गलत बात पसंद नहीं थी, इसलिए हमेशा नौकरी से निकाला जाता था । बेटा ! बड़ी मुश्किल से नौकरी मिली है ,बस दूसरो के लिए लड़ना छोड़ के अपने लिए कुछ करना सीखों ।ठीक है माँ …. अगले दिन रंजन समीर के घर पहुँचा और समीर के ऑफिस के लिए निकल गए ।ऐसे ही दिन बीत गए , समीर की बीवी मीरा और बच्चों को कहीं ले के जाना हो या घर का कोई काम हो रंजन सब काम अच्छे से करता था । ये देख मीरा भी उस पर विश्वास करने लगी और उसे अपने भाई की तरह समझने लगी थी ।


उसकी माँ भी खुश थी कि रंजन अब अपनी ज़िम्मेदारियों को समझ रहा हैं । एक दिन बहुत तेज़ बरसात हो रही थी ।तभी समीर का फ़ोन आया कि उसका पर्स कार में रह गया है । उसे लेकर ऊपर आ जाओ ! ! जैसे ही रंजन ऊपर पहुँचा और घंटी बजाई तो उसने देखा की समीर नशे में लड़खड़ाते हुए दरवाज़े पे आया और हाथ से पर्स छीन गिर पड़ा । आस-पास खड़े उनके दोस्त भाग के आए और मेरी तरफ़ देख कर बोले उठाओ इसे अंदर ले कर चलो । मैं जब अंदर पहुँचा तो मेरे पैरो तलों जमी खिसक गई । अंदर का वो नजारा बड़ा ही शर्मसार करने वाला था ।मैंने देखा बहुत सारे युवक युवतिया एक दूसरे की बाहों में बाहे डाले बेहोश पड़े है । थोड़ी देर में एक लड़की आयी और समीर सर के पास बैठ गई । नीचे आकर भी वो मंज़र मेरे सामने घूम रहा था ।सर का इतना अच्छा परिवार है ,फिर भी अपनी बीवी को धोखा दे रहे है ।


अगले दिन हम दोनों एक दूसरे से नज़र चुराए कार में जा बैठें । तभी समीर सर की आवाज़ आयी ये लो पैसें और कल जो भी हुआ उसे भूल के भी मीरा को मत बताना । ग़लत का साथ ना देने वाला सच में गलती कर बैठा, खामोशी की कीमत ले सच को झुठला बैठा !!


समीर से लिए पैसों से वो घर में क़ीमती चीजे , खाने का महँगा सामान लेकर लाया ।ये देख उसकी माँ को आश्चर्य हुआ !! ये सब कहाँ से आया है?? …”कुछ नहीं माँ समीर सर ने खुश होकर दिया है “। रंजन को भी आख़िर झूठी शान की लत लग ही गई । कुछ दिन बाद दोपहर को मीरा ने रंजन को घर बुलाया । मीरा आरती का थाल लेकर आई, रंजन ये सब देख हैरान परेशान हो गया !! ये सब क्या है मैम ! ….. आज राखी का दिन हैं और तुम मुझे हमेशा मेरे भाई की याद दिलाते हो ।जो अब इस दुनिया में नहीं हैं ! तो क्या मैं तुम्हें राखी बांध सकती हूँ । ख़ामोश हिचकिचाते हुए सिर को हिला के बोला “ठीक है बांध दो “! मीरा की ख़ुशी उसके चेहरे से छलक रही थी जो रंजन को टीस की तरह चुभ रही थी । जैसे ही वो बाहर जाने लगा तभी वो मुड़ा और मीरा को राखी के पवित्र बंधन की खातिर समीर के बारे में सब बताने लगा । वो सब सुन मीरा ने उसे एक झन्नाते दार चाटा मारा…..तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ?? मेरे समीर के बारे में ऐसा बोलने की…मैंने तुम्हें अपने भाई का औदा दे इतनी इज़्ज़त दी और तुम …… कुछ लोग होते ही नहीं है इस लायक़ …निकल जाओ । लेकिन मैम ,मैं सच कह रहा हूँ …. मैंने दूसरो के भले के लिए कितनी बार अपने पांव पे कुल्हाड़ी मारी ,पर दुनिया को तो हर बार मैं ही ग़लत नज़र आता हूँ ।

हर बार की तरह इस बार भी सच झूठा निकला

किसी अपने के विश्वास को धोखा देना कितना आसान निकला ॥


स्वरचित रचना

स्नेह ज्योति


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