आज रवि कमरे मै अकेला बैठा सोच रहा था की काश मैंने घरवालों की जगह अपनी पत्नी की बात का विश्वास किया होता तो यूं उसकी जिंदगी वीरान नही होती
ज्योति शादी हो कर आई तब से ही मां और बहन को पता नही उसका रवि के करीब आना पसंद नही था दोनों
की लव मैरिज थी मां ने बेटे की खातिर इजाजत तो दे दी लेकिन ज्योति को कभी नही अपनाया
दोनों की साजिश रवि समझ नही पाया उनका ज्योति के खिलाफ भड़काना उसके चरित्र पर लांछन लगाना रोज रोज एक ही बात से रवि बही सच मानने लगा अब वो ज्योति की बात को झूठा और मां की बात को ही सच मनाता शक इतना बढ़ गया की सच रवि देख नही पाया और दोनों अलग हो गए
आज मां और दीदी को बात करते सुना दीदी कह रही थी देखा मां हमने ज्योति को अलग करवा ही दिया हम शादी की मना करके बुरे भी नही बने अब कुछ दिनों मैं अपनी पसंद की लड़की से शादी कर देना
आज उसकी आंखे खुल गई थी पर अब क्या कर सकता अपने पैरों पर उसने खुद ही कुल्हाड़ी मारी थी
स्वरचित अंजना ठाकुर
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