दसवीं कक्षा में पढ़ने वाला संकल्प बहुत ही होशियार और मेधावी छात्र था। एक दिन स्कूल के एक अध्यापक राजीव सर ने उसकी मेहनत और लगन को देखते हुए उसे बताया कि "यूसीएल (UCLA) यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया लॉस एंजेलिस में चार हफ्ते का एक समर प्रोग्राम होता है इसमें सभी देशों से बच्चे आते हैं, और हर देश से सिर्फ दो बच्चे चुने जाते हैं। मैं चाहता हूं कि तुम उस में पार्टिसिपेट करो।"
संकल्प ने घर आकर मम्मी (चारु) को बताया......चारु ने उसकी पूरी बात को समझा और उसे पार्टिसिपेट करने के लिए हाँ कह दिया लेकिन तभी मन ही मन डर आया कि इस प्रोग्राम में तो खर्चा बहुत अधिक होगा और वह कहा से होगा।
उसने देखा संकल्प कुछ उदास है, पूछने पर उसने बताया कि मम्मी इसमें तो बहुत खर्चा हो जाएगा, लेकिन तभी उसे याद आया कि सर ने कहा था इस प्रोग्राम में UCLA की तरफ से कुछ बच्चों को स्कॉलरशिप मिलती है।" अगर मुझे स्कॉलरशिप मिली तो आप मुझे भेजोगे ना।"
शाम को सुमेष जी के घर आने पर चारु ने उनको संकल्प की सारी बातें बताई। उस पर उन्होंने भी अपनी सहमति दिखाई और बेटे को बोला तुम अपनी तैयारी में लग जाओ,बाकी सब अपने पिता पर छोड़ दो। यह तो हमारे और हमारे परिवार के लिए गर्व की बात होगी कि तुम्हें स्कूल से यूएसए (USA) जाने का मौका मिलेगा।
संकल्प के साथ इस प्रोग्राम पर राजीव सर ने भी बहुत मेहनत की और कदम कदम पर उसका पूरा मार्ग दर्शन किया। वह दिन आ गया जब उसे 75% स्कॉलरशिप के साथ यूएसए(USA) जाने का मौका मिला।
यह सुनकर चारु और सुमेष की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परंतु हर परिवार में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो किसी को आगे बढ़ता देख खुश नहीं होते और अपनी टांग अड़ाना शुरू कर देते है। वहां अकेला कैसे जाएगा, क्या खाएगा, अनजान देश में कैसे रहेगा, और हमें तो इतना पैसा खर्च करने का कोई वजह भी समझ नहीं आता। वगैरह-वगैरह.....।
इतना ही नहीं उसके अपने ताऊजी ने तो यहां तक कह डाला कि अगर संकल्प वहां गया तो उस दिन से तेरा मेरा रिश्ता खत्म क्योंकि वहां जाकर वह बिगड़ जाएगा और फिर कभी घर वापस ही नही आएगा और अगर घर वापस आ भी गया तो अपने साथ अनेको बुरी आदतों को लाएगा जिससे हमारे घर और खानदान की बहुत बदनामी होगी।
वही चारु ने उसकी नानी को उसके जाने का बताया तो वह सुनकर बहुत खुश हुई और एकदम से कह दिया कि"इसके यूएसए(USA) के जाने आने की टिकट मेरी तरफ से आशीर्वाद स्वरूप होगी।" उन्होंने कहा "देख ले....तेरे पापा हमेशा कहते थे कि यह कुछ बड़ा करेगा आज उनकी कहीं बात की शुरुआत हो गई।"
अब चारु और सुमेष ने ठान लिया था, कि वह उसे USA भेजेंगे और पूरे आत्मविश्वास के साथ सबको कह दिया था कि वह कुछ गलत नहीं करेगा और वह वहाँ जाकर सब कुछ मैनेज कर लेगा। कुछ लोग जो उसे रोकने की बहुत कोशिश कर रहे थे वे सब अब चारु और सुमेष के सामने नाकाम रहे और संकल्प यूएसए (USA) पहुंच गया।
उसने वहाँ मन लगाकर समर प्रोग्राम में भाग लिया और फर्स्ट प्राइज (1st prize) लेकर अपने स्कूल और देश का नाम रोशन किया। घर वापस आने पर वे सभी लोग जो जाने के समय में टांग अड़ा रहे थे और तरह-तरह की बातें बना रहे थे वह सब अब अपनी बात से मुकर कर यह कहते नजर आए कि हां हां हमें तो पता ही था हमारा संकल्प बहुत होशियार है और हमें तो पता ही था कि वह एक दिन हमारे घर का गौरव बढ़ाएगा।
स्वरचित रचना
नीरू जैन (दिल्ली)
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