दूसरे से जलन खुद का गम नही बन जाए

 सरिता की जेठानी के बेटे सागर की एक ऊंची कम्पनी मैं नौकरी लग गई उसकी नौकरी के बाद उनके घर का रहन सहन बिलकुल बदल गया धीरे धीरे बेटे ने मकान भी ले लिया किस्तों पर अब सरिता को अपनी जेठानी के ऐश देख कर जलन होने लगी की कल तक कितने गरीबी मैं दिन गुजार रही थी और आज उनसे भी आगे निकल गईं  सरिता के पति की कपड़ों की दुकान थी और उनका मानना था की बेटा भी बड़ा हो कर उनका हाथ बटाएगा वैसे भी कुणाल का पढ़ने मैं मन कम लगता था

लेकिन सरिता ने जलन के कारण कुनाल को भी बोला की तुम भी उसी परीक्षा की तैयारी करो जो सागर ने दी थी मैं भी चाहती हूं तुम भी उसी की तरह नौकरी करो

मां की जिद्द के आगे सागर ने कोचिंग लगा ली लेकिन उसकी समझ से बाहर था लगातार कम नंबर आ रहे थे और परीक्षा मैं भी पास नहीं हो पाया सरिता उसे ताने मारती जिस कारण वो डिप्रेशन मैं चला गया और उसने खुदकुशी करने की कोशिश करी बड़ी मुश्किल से उसे  बचाया तब सरिता को समझ आया की उसकी जलन की वजह से आज उसका बेटा जान गंवा देता अब किसी को देख कर जलन नही करूंगी


स्वरचित

अंजना ठाकुर 


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