आज विनीत बहुत उदास था और चुपचाप गुमसुम सा अपने कमरे में कुर्सी पर सिर टिकाए आंखें बंद करके बैठा था कि थोड़ी देर आराम कर लूं।लेकिन जिसके सुखी संसार मे उथल पुथल मच गई हो उसको आराम कहाँ मिलता।
आंखे बंद करते ही जैसे पिछली ज़िन्दगी की सभी घटनाएं एक चल चित्र की भांति उसकी आँखों के सामने घूमने लगी।
कितने खुश थे दोनो अपनी ज़िंदगी मे।विनीत की शादी को अभी दस साल ही तो हुए थे। कितने रिश्तेदारों और दोस्तों को मन ही मन ईर्ष्या हुई थी जब उसकी बार्बी डॉल जैसी गोरी चिट्टी दुल्हन को सबने देखा था। इतनी सुंदर थी रंजना के लगता था हाथ लगे तो मैली हो जाये।होती भी क्यों न विनीत की अपनी पसंद जो थी।लोग समझते थे कि ये प्रेम विवाह है लेकिन वो दोनो ही जानते थे कि उन्होंने शादी से पहले कभी एक दूसरे की आवाज भी नही सुनी थी।
विनीत रंजना को कॉलेज आते जाते देखा करता था तो उसको उसके घर और कॉलेज का भी पता चल गया था।
घर में जब विनीत की शादी की बातें होने लगी और रिश्ते आने लगे तो विनीत ने अपनी मम्मी को बता दिया कि वो शादी करेगा तो उसी लड़की से वरना नही करेगा।
माँ बाप ने भी बेटे की खुशी के लिए रंजना के घर जा कर उसके पापा से बेटी का हाथ मांग लिया और उन्होंने खुशी खुशी इस रिश्ते के लिए हामी भर दी। क्योंकि ऐसे परिवार में लड़की देने को कौन मना करेगा जहां लड़का बहूत शरीफ और उसके परिवार वाले बहुत अच्छे और साख वाले लोग थे।
बहुत खुश थे सब ऐसी बहु पा कर। विनीत ओर रंजना भी एक दूसरे से बहुत खुश थे। फिर उनकी ज़िंदगी मे दो प्यारे प्यारे बच्चे आ गए।
जैसे जैसे परिवार बढ़ता है जरुरतें बढ़ती हैं, खर्चे बढ़ते हैं आकांक्षाएं बढ़ती हैं। विनीत ने सोचा क्यों न परिवारिक बिज़नेस से हट कर कुछ अलग किया जाए जिससे आमदनी भी बढ़ जाएगी और बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित कर पाएंगे।
यही सब सोचते हुए विनीत ने अपने किसी दोस्त के साथ मिल कर नया व्यापार शुरू किया क्योंकि उसके उस दोस्त को उस काम का अच्छा ज्ञान था और वो बहुत समय से उस व्यपार से जुड़ा हुआ था।
धीरे धीरे एक साथ काम करते करते दोनो की दोस्ती और गाढ़ी होती गयी और दोनो एक दूसरे के घर आने जाने लगे।
फिर एक दिन विनीत के उस दोस्त ने बताया कि उसकी पत्नी बीमार रहती है और बेड पर ही है। रंजना और विनीत जब उनके घर जाने लगे तो रंजना उनके घर और बच्चों के कामो में मदद करने लगी। लगता था दोनो परिवार एक ही हैं। धीरे धीरे विनीत को लगने लगा कि उसके बिज़नेस में घाटा पड़ने लगा था और वो घर के बढ़ रहे खर्च को संभाल नही पा रहा।
लेकिन उसके दोस्त ने उसके घर पे किसी चीज की कमी नही आने दी। वो किसी न किसी मौके पर रंजना और बच्चों को महंगे महंगे तोहफे देता रहता। विनीत को तो जैसे अपने दोस्त पर कुछ ज्यादा ही विश्वास था। और वो तो ऐसा वैसा कुछ सोच भी नही सकता था।
लेकिन एक दिन उसके पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकल गयी जब उसको पता चला कि जिस दोस्त पर उसने अंधविश्वास किया था उसी ने उसके साथ विश्वासघात कर डाला। दोस्ती की आड़ में उसी की पीठ पर छुरा घोंप दिया।
उसको पता ही नही चला कब उसके भोलेपन का फायदा उठाते हुए उसकी पत्नी और दोस्त एक दूसरे के करीब आ गए। जिनपर वो कभी शक करना तो दूर उनके बारे में गलत सोच भी नही सकता था उन्होंने ही उसके प्यार का नजायज फायदा उठाते हुए धोखा किया।
उसने अपने टूटते हुए घर को बचाने के लिए दोनो को समझाने की बहुत कोशिश की।लेकिन वो इस रिश्ते में इतने आगे बढ़ चुके थे कि अब उनको समझाना तो उनके सामने अपना माथा फोड़ने के समान था। काश उसने उस दोस्त को अपने घर में न लाया होता ऐसा करके उसने खुद अपने ही पांव में कुल्हाड़ी मार ली है।
एक समय जिस परिवार की खुशहाली को देख कर लोग ईर्ष्या करते थे आज उस घर को किसी की ऐसी नजर लग गयी है कि दोनो के बीच आई हुई दूरियों को परिवार वाले भी ठीक नही कर पा रहे और ये दूरियों की खाई इतनी बड़ी हो गयी है कि अब दोनो में से कोई भी उसको पार नही कर पा रहा।
भगवान का दिया सब कुछ होते हुए भी जिस घर मे कभी उन दोनों के साथ बच्चों की किलकारियां और हंसी गूंजा करती थी ।
आज वो घर टूटने की कगार पर है।
उस घर मे अब हर तरफ अंतहीन सूनापन और उदासी पसरी रहती है। अपना ही घर काटने को दौड़ता है। एक छत के नीचे रहते हुए भी दोनो अजनबी बन गए हैं।
स्वलिखित एवं मौलिक
रीटा मक्कड़
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