" मिसेज़ खन्ना को देखो कितना बन संवर कर रहती हैं, हर पार्टी की शान होती हैं, घर पर भी स्मार्ट बनकर रहती हैं और एक तुम हो जिसे फैशन का कोई सेंस ही नहीं है। "- शोभित ने पत्नी से कहा।
" आपने बिलकुल सही कहा। अब से मैं भी बनठन कर रहा करूंगी। अब जल्दी से चलकर, मुझे नये फैशन के कपड़े दिला दो , कुछ मैचिंग ज्वैलरी और पार्लर ले चलो, कल की पार्टी में मेरा नया रूप देखना और हाँ, कामवाली बाई भी रखवा दो, घर पर भी मैं, मिसेज़ खन्ना की तरह कोई काम न करके बस बन संवर कर रहा करूंगी । "
" ऐसा कहकर मैंने अपने पैर पर स्वयं कुल्हाड़ी मार ली"- शोभित सिर पकड़ कर बैठ गया और बोला, " हे प्रिय ! तुम जैसी हो वैसी अच्छी हो"।
ऋतु रानी
स्वरचित कहानी
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