जैसे को तैसा

 मणिक एक रईस बिजनेसमैन का इकलौता बेटा। एकदम नकचढ़ा, गुस्सैल, हर वक्त गुस्से में भरा रहता। बापौती मिल गई, पिता के बिजनेस अंपायर को संभालता। स्टाफ के संग एकदम बदतमीजी से पेश आता, बड़ा हो या छोटा किसी का लिहाज नहीं करता। जरा कोई मुंह खोलता तो उसको नौकरी से निकाल देता ।

अभिमान दिन पर दिन बढ़ता जा रहा था। एक दिन अपनी नई गाड़ी में बैठ कर ऑफिस जा रहा था। ऑटो वाले से उसकी गाड़ी में साइड लग जाती है। गाड़ी पर डेंट आ जाता है। मणिक गुस्से से आगबबूला हो जाता है। वह गाड़ी से उतर कर तेड़ से ऑटो वाले के चांटा रसीद देता है और गालियांँ देने लगता है।

ऑटो वाले को पिटता देख, बहुत सारे ऑटो वाले एकत्रित हो जाते हैं। वह सब मिलकर मणिक को धुन देते हैं। कुछ लोग उसका वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं।

मणिक की बहुत बेइज्जती होती हैं। ऑफिस में भी सारा स्टाफ उसकी बहुत हंसी उड़ाता है। एक तो सरेआम उसकी पिटाई हो जाती हैं ऊपर से उसका वीडियो वायरल हो जाता है। वायरल वीडियो से उसे ऐसा महसूस होता है जैसे कोई उसके जख्मों पर नमक डाल रहा है।

आज उसे अपने पिता की कही बात बहुत याद आ रही थी,"किसी को छोटा बड़ा मत समझो। सभी मनुष्य बराबर हैं। और सभी के संग अच्छा व्यवहार करना चाहिए।"

उसकी माता उसे सदैव समझाती,"अगर तुम्हारे पास चार पैसे ज्यादा आ गए तो उसका घमंड क्या करना? तुम्हारा पैसा तुम्हारे लिए। उस पैसे से तुम किसी को खरीद तो ना लोगे"।

अपने माता-पिता की सीख को याद करते हुए मणिक को बहुत पश्चाताप हुआ।


स्वरचित मौलिक

   प्राची लेखिका

बुलंदशहर उत्तर प्रदेश


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