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बेटी होना पाप नहीं

 माँ, पापा कहाँ है, पूछते हुए दामिनी रसोईघर मे घुसी। अरे! यह क्या कर रही है? बाहर से आकर सीधे रसोई मे घुस गईं, और यह क्या ना प्रणाम ना गले लगना,बस आते ही पापा कहाँ है। पहले मुझसे मिल ले फिर पापा की खोज खबर भी ले लेना।अब दामिनी को अपनी गलती का एहसास हुआ।उसे गुस्सा मे इतना ध्यान ही नहीं रहा कि वह सफऱ से आकर सीधे रसोई घर मे घुस गईं है,जबकि माँ ने बचपन से ही यह सिखाया है कि बाहर से आकर पहले हाथ पाँव धोते है फिर जाकर और कोई काम करते है, पर आज दामिनी  इतने गुस्से मे है कि उसे इस बात का ध्यान ही नहीं रहा। ठीक है, मै जाकर ड्राइग हॉल मे बैठती हूँ।ड्राइंगहॉल मे क्यों बैठना है? सफर से आई हो थकी होंगी जाओ जाकर हाथ पैर धोकर कपड़े बदलकर आराम करो। और तुम एकाएक चली आई। किस चीज की छुट्टी है? छुट्टी नहीं है। छुट्टी लेकर आई हूँ। वाह! क्या बात है। मै जब आने को बोलती हूँ तो कहती हो कि छुट्टी नहीं है और आज स्वयं आ गईं। आई नहीं, आना पड़ा, पापा ने जो किया है उसके कारण आना पड़ा। पापा ने क्या किया है। मेरा विवाह पक्का किया है। वो तो तुमसे पूछ कर ही किया है। विवाह न पूछकर तय हुआ है, पर दहेज तो पूछकर नहीं दिया जा रहा। पापा ने कहा, बेटी को खाली हाथ नहीं विदा करते है और तुम्हारा भी तो मेरी सम्पति पर कुछ अधिकार है। बस उसी मे से कुछ तुम्हे दें रहा हूँ, तो मै सामान देने पर तैयार हो गईं। लेकिन अब विनीत के पापा ने  यह धमकी देकर कि यदि नहीं देंगे तो सगाई थोड़ देंगे दहेज मे तरह तरह के डिमांड कर दिया है और पापा उनके सामने हाथ जोड़कर, विनती करके आए है कि सगाई नहीं तोड़िये, आप जो जो कहेंगे वह मै दूंगा। मुझे इस बात पर एतराज है। पापा से मै साफ साफ कह दूंगी कि उन्हें लड़की पैदा करने पर शर्म आ रही है तो उनका वे जाने, पर मुझे अपने लड़की होने पर कोई शर्मिंदगी नहीं है। जहाँ पर  मेरे पापा को लड़की वाला होने के कारण विवाह के लिए ‘ पैरो पर नाक रगड़ना पड़े ‘ वहाँ पर मै विवाह नहीं करूंगी। अच्छा बाबा जो तु कहेगी वही करूंगा। अब दामिनी नाम रखा है तो क्या बिजली की तरह कड़कती रहेगी या आकर पापा के गले भी लगेगी। तभी माँ बेटी के बातो के बीच मे आकर पापा ने यह कहते हुए अपनी बेटी के सर पर गर्व से हाथ फेरा।


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