दरिंदो से बहन बेटीयो को बचाना

 हर रोज की तरह अनिल आज भी अपने परिवार की जिम्मेदारी का निर्वाह करने रात्रि मे आटो लेकर निकल पडा ...एक बीस वर्षीय लडकी उसकी सवारी बनी थी जोकि शायद कहीं नौकरी करनेवाली थी और लेट हो गई थी ...उसे उसके गंतव्य तक पहुंचाने अनिल तेजी से आटो चला था ...रात के ग्यारह बज चुके थे सडक सुनसान थी दूर दूर तक अंधेरा था सर्दियों का मौसम था सो आवाजाही भी कम थी अचानक टुस्ससससस की आवाज हुई आटो पूरी तरह चकराने लगा अनिल ने संभालते हुए आटो रोककर देखा तो पता चला टायर फट गया था वह तुरंत टायर बदलने की कोशिशों मे लग गया ...तभी वहां से एक बडी गाड़ी निकली ...कुछ आगे जाने के बाद अचानक पीछे को आने लगी .. अनिल समझ गया जरूर कोई बिगडे बाप की औलादें है जो आटो मे जवान लडकी को देखकर वापस आ रहे है ...वो टायर छोडकर लडकी से बोला -बेटा ...चुप रहना और ऐसे करना जैसे तुम्हारी तबीयत खराब है ...

लडकी कुछ हैरान थी और कुछ गुस्से मे मगर समाज मे आए दिन होती घटनाओं से मन मे खौफजदा भी थी इसलिए चुपचाप रही ...गाडी पास मे आकर रुकी तो गाडी का ड्राइवर बोला-साहब... मस्त माल है ....बोला था ना देखिए तो ...और घिनोनी सी हंसी हंसने लगा ...गाडी का शीशा नीचे कर उसमें बैठे युवा ने भी आटो मे बैठी लडकी की और नजरें घुमाई इससे पहले वो कुछ कहता आटो ड्राइवर अनिल भागकर उसतक पहुंचा और बोला - साहब लडकी है इसे एड्स है मदद कीजिए ...बेहोश हो गई है और मेरा आटो पेंचर है ...कही कुछ हो गया तो मे गरीब मारा जाऊंगा...

और भागकर अपनी सीट के नीचे से एक फाइल उठाकर ले आया .....गाडी मालिक युवा बोला-हट साले ....मे कोई मददगार नहीं ...ओए गाडी चला  ...सुना नहीं तूने  क्या बोला ये बूढा... उसे एड्स.....चल ...

और गाडी तेजी से चली गई .....उसके बाद अनिल वो फाइल सीट के नीचे रखकर बोला-बेटी ....मे बूढा आजकल के ऐसे बिगडे वहशियों से लड नहीं सकता मगर अपने होते किसी बहन किसी बेटी को लुटते भी नहीं देख सकता इसलिए मैने ये एड्स पीडित वाली एक नकली फाइल बनवा रखी है जोकि कभी ना कभी किसी भी बहन बेटी की आबरू बचाने मे काम आ जाती है ...इतना कहकर वो वापस टायर बदलने मे लग गया वही लडकी भीगी आँखो से उसे नमन कर रही थी

क्या हम अपने लडको से देर रात गंदी घटनाओ को रोकने के लिऐ प्रेरित करेंगे ?  अनिल जैन


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