आज अनिल की नींद कुछ जल्दी खुल गई ....
फ्रैश होकर बालकनी में आ गया पर चारों तरफ़ सन्नाटा देख कर वहाँ उनका मन नही लगा और पूरे रौब से पत्नी अंजना को आवाज देने लगा...,अरे भई... कुछ चाय वाय भी मिलेगी या नही....
अंजना हड़बड़ा कर उठी....
हे....अभी तो सुबह का सात भी नही बजे ...और आप चाय का हल्ला मचा रहे है...
अनिल के अंदर भक्क से कुछ हुआ......
शायद मर्द जाग गया था....
गुस्से में बोला...तो क्या.... चाय की तलब भी समय देख कर होनी चाहिए....
अंजना बिना बहस किए चाय बना लाई थी और बाबूजी के कमरे में भी चाय रख दी...
,बाबू जी... उठिए ...चाय ...गर्मागर्म चाय हाजिर है...
बाबूजी चौंके पर फिर मुस्कुराऐ.... मन ही मन बुदबुदाए...
लगता है हमारे घर का मर्द जाग गया है .....वर्ना चाय तो सात बजे तक वो स्वयं ही बनाते थे...
बेटी अंजना बड़ी खुश हो जाती थी.....
उसको खुश देख कर बाबूजी भी खुश...
नाश्ते का वक्त हुआ तो सिर्फ़ ब्रैड कॉफ़ी देख कर अनिल के अंदर फिर भक्क से हुआ......
शायद मर्द आहत हो गया था...
"ये नाश्ता है..... आज कुछ नही बना...
उत्तर बाबूजी ने दिया... आज बहू की तबीयत कुछ ढीली है... चुपचाप खालो...
अनिल अनमने से टीवी के आगे सोता जागता रहा...
तभी बाबू जी ने लंच के लिए पुकारा...
उनके साथ बहू भी हड़बड़ा कर आ गई...... उसे हैरान देख कर वो बोले..."तेरी तबियत ठीक नही थी...तू सो गई थी.. देख मैने कितनी बढ़िया खिचड़ी बना ली है.....
अभी सब खाने बैठे ही थे कि दिल्ली से आकाश का फोन आ गया,...
देख ले , तेरे दादू की बनाई लाजवाब खिचड़ी.....
आज तेरी माँ की तबीयत ठीक नही थी...
"अरे वाह .....देखने में तो बहुत यमी लग रही है...
सच में खाने में कितनी यमी होगी।"
दादा जी ने अपना सीना ताना...तब तक अंजना ने फ़ोन खींच लिया....
देख तो आज सुबह से दादू ने ही कमान सम्हाल रखी है...
खैर... इस समय कैसे याद किया
"मम्मी.....वो जरा पुलाव बनाने का तरीका बता दो...
आज पूनम भी थक कर सो गई है... उसे सरप्राइज देने का मन है
माँ -बेटा और दादू आपस में खूब हँसते रहे...
अनिल को किसी ने पूछा तक नही... उसके अंदर का मर्द फिर हिला...
पर ऊँह... मुझे क्या...
यहाँ तो मेरे सिवा कोई मर्द है ही नही...
इस लॉकडाउन ने सबको औरत बना दिया है...
शाम को बाबू जी ने पुनः चाय का जिम्मा ले लिया और इस बार पोते की बहू को वीडियो कॉल किया.."देख तो ज़रा, तेरी सास कितना काम ले रही है...
उधर से पूनम उछली......
हाय दादू, आप तो बड़ी टेस्टी चाय बना लेते हैं....
इस बार वहां आने पर हमको भी पिलाइऐगा
बाबू जी बाग बाग हो गए....
इस बार अनिल के अंदर भक्क तो हुआ पर उनको थोडा़ चैतन्य कर गया.....
थोड़ी देर बाद अंजना की आवाज सुनाई दी....बाबू जी, रात के लिए कौन सी सब्जी बना लूँ....
फिर कुछ सोच कर...तोरई बना लेती हूँ...ठीक है..
उनकी हामी मिलते ही फ्रिज़ के पास आई....क्या देखती है.... अनिल बाबू पीलर से तोरई छील रहे है... वो जोर से चिल्लाई.... बाबू जी.....
"अरे हल्ला क्यों मचा रही हो...
जब बाबूजी और आकाश कर सकते हैं तो मैं क्यों नही...
अंजना पल्लू में मुँह दबा कर हँसे जा रही थी ...पर धीरे धीरे उनके अंदर का मर्द धराशायी हो गया था...वो हौले से मुस्कुराया..... लॉकडाउन टूट गया था....
अनिल भी अब परिवार प्रेम के रंग मे रंग चुका था....
एक दोस्त की सुंदर रचना
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