ईश्वर का न्याय

 मेरे बच्चे को हाथ मत लगाना बांझ कहीं की में नहीं चाहती तेरा बुरा साया मेरे बच्चों पर पड़े रमा की देवरानी किरण उसे धक्का मारते हुए बोली ।पर किरण इसमें मेरा क्या कसूर अगर मेरे बच्चे नहीं हुए ।क्योंकि तुम  बदकिस्मत हो जाओ यहां से ,किरण अक्सर ऐसा ही सुलूक करती और रमा ममता मैं बच्चे को खिलाने चली जाती ।आज अचानक किरण सीढ़ियों से गिर गई उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट थी डॉक्टर ने छ:महीने बिस्तर से हिलने की मना किया मजबूरी में रमा को ही बच्चे को पालना पड़ा अब किरण को अहसास हुआ कि भगवान की लाठी मै आवाज नहीं होती।वो रमा का दर्द समझ चुकी थी


अंजना ठाकुर  


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