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*उलझन*

       अरे रमेश इतने दिन बाद दिखाई दिये हो,कहाँ थे?

       सुरेश तुम,वास्तव में भाई काफी दिनों में मुलाकात हुई है।असल  मे भाई मैं बेटे के पास  विदेश चला गया था।इसी कारण मुलाकात नही हो पायी थी।खैर अब मिलते रहेंगे।

       रमेश और सुरेश बचपन के मित्र थे।रमेश के एक बेटा था जो अमेरिका में जॉब कर रहा था,इधर सुरेश के एक ही बेटी थी जिसने अपनी एजुकेशन पूरी कर ली थी और सुरेश आजकल अपनी बेटी की शादी के लिये अच्छे लड़के की तलाश में थे।अंदर की बात ये थी कि सुरेश अपनी बेटी की शादी उस लड़के से नही करना चाहते थे जिसे उनकी बेटी प्रियंका प्यार करती थी। अपनी बेटी को उन्होंने साफ मना कर दिया था।

       बात बात  में सुरेश ने अपनी बेटी के लिये किसी योग्य लड़के के बारे में पूछा,तो रमेश ने कहा कि वह जरूर बताएंगे,आखिर प्रियंका उनकी भी बेटी जैसी है। प्रियंका रमेश जी को जानती ही थी क्योंकि वह उनके घर आते जाते रहते थे।प्रियंका को जब पता लगा कि रमेश अंकल आये हुए हैं तो वह एक दिन उनके घर गयी और सब बातें बता कर कहा कि वह आशीष से शादी करना चाहती है पर पापा तैयार नही है।प्रियंका ने ये भी कहा कि वह किसी अन्य से शादी नही करेगी।रमेश जी ने प्रियंका से आशीष को मिलाने को बोला तथा उसके बारे में सब जानकारी प्राप्त की- प्रियंका से भी तथा अपने सूत्रों से भी।आशीष से रमेश जी जब मिले तो उन्हें आशीष भा गया।उन्होंने प्रियंका की शादी आशीष से कराने का वायदा कर लिया।परंतु सुरेश ने रमेश की इस बात को सिरे से नकार दिया।रमेश ने सुरेश को समझाने का भरसक प्रयास किया,पर सुरेश को न मानना था सो न माना।

      रमेश जी ने प्रियंका की शादी  आर्य समाज मे कराकर उसे पंजीकृत करा दिया।शादी के बाद  रमेश जी ने आशीष और प्रियंका को सुरेश जी के पास आशीर्वाद लेने भेजा।सुरेश जी आशीष और प्रियंका की शादी को स्वीकार नही कर पाये।वे समझ चुके थे कि यह शादी रमेश द्वारा कराई गयी है।उन्होंने रमेश को जिम्मेदार ठहरा कर खूब अपमानित भी किया।उन्हें रमेश से घृणा हो गयी।उन्होंने प्रियंका से ही नही रमेश से भी संबंध विच्छेद कर लिये। 

        सुरेश जी अतिरेक में सबसे सम्बन्ध विच्छेद तो कर बैठे पर बिल्कुल अकेले पड़ गये।समय अंतराल ने उन्हें समझा दिया था कि वे ही गलती पर थे।रमेश ने तो उनकी उलझन को ही सुलझाया था।एक दिन शाम को पस्त से सुरेश रमेश के घर पहुँच गये और बोले रमेश भाई अब नही सहा जाता, मुझे मेरी बेटी और दामाद से मिलवा दे यार। मैं हार गया,मेरे दोस्त मैं हार गया।रमेश ने सुरेश को बाहों में भर लिया।कुछ देर में ही दोनो जा रहे थे बिटिया के घर की ओर।

बालेश्वर गुप्ता,नोयडा

मौलिक एवम अप्रकाशित


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