सबोथ अपने लेखन कार्य मे व्यस्त थे कि उन्हें मालती के बड़बड़ाने की आवाज़ सुनाई दी, रोज़ मालती का अपनी किस्मत के लिए रोना उन्हें परेशान करने लगा था।
मालती से उनका विवाह चार वर्ष पहले हुआ था,वे एक आदर्श वादी परिवार से थे,दहेज लेना उनके सिद्धांतों के विरुद्ध था, अत: सवा रुपया और नारियल से उनका विवाह हुआ था,मालती एवं उसका परिवार भी बिना दहेज के विवाह से बहुत खुश था।सुबोध ने भी अपनी सीमित आमदनी में से मालती को हर प्रकार की सुख सुविधा देने की कोशिश की थी,अभी तक सब अच्छा चल रहा था, परन्तु एक वर्ष पहले जब मालती की छोटी बहन का विवाह खूब भव्य हुआ, दान दहेज खूब दिया गया तो मालती असंतुष्ट रहने लगी, वह रोज़ उन्हें दहेज न लेने के लिए कोसने लगी, सुबोध मालती के तानों से तंग आकर रोज़ खून के आंसू बहाते, सुबोध समझ नहीं पा रहे थे कि दहेज़ लेने के लिए हमेशा लड़के वालो को ही क्यों दोषी ठहराया जाता है।
ऋतु दादू
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