अबकी बार तुक्का निशाने पर अचूक लगा।
सागर के तो होश ही उड़ गए।पिंकी को इन सब बातों की हवा कैसे लग गई ये मेरी छोटी बहन है या सीआईडी की जासूस और कोई काम नहीं रहता इसके पास भैया की मुखबिरी के अतिरिक्त मन ही मन कुड़कुडाता सागर बाइक से उतर कर पिंकी की ओर दौड़ पड़ा।
अरे सुन तो रुक तो मेरी प्यारी गुड़िया सी बहन ।चल मेरी बाइक तेरा ही इंतजार कर रही है आ जा तुझे बाइक पर घुमाऊंगा भी और कुल्फी भी खिलाऊंगा सागर ने मिश्री घोलती आवाज में कहते हुए तेजी से बढ़कर पिंकी का हाथ पकड़ लिया।
.... और गोलगप्पे भी ... कुल्फी का नाम सुनते ही पिंकी उछल पड़ी सुनहरे अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया उसने।
हां हां जो भी तू बोलेगी सब खिलाऊंगा बस ये कच्चा चिठ्ठा की थैली बंद रखना पापा को भनक भी लग गई तो अभी बाइक उठाकर कबाड़ी को बेच देंगे... सागर ने हाथ जोड़ मिनमिनाते हुए कहा।
नहीं मेरे प्यारे भाई अगर तुम रोज मुझे कुल्फी खिलाते रहोगे तो ये थैली बंद ही रहेगी । भला कोई बहन अपने भइया का बुरा चाहेगी क्या!! कुल्फी खाते खाते पिंकी अपने तुक्के के सही निशाने पर गर्व करती शरारत से मुस्कुराने लगी थी और सागर अपने कच्चा चिठ्ठा को छिपाने के लिए छोटी बहन की कुल्फी खिलाने जैसी छोटी सी शर्त को मानने को प्रतिबद्ध हो उठा था।
साधारण रंग रूप मगर गुणवान तनिषा को उसकी जेठानियाँ और ननदे सांवली होने के कम अहमियत देते थे।
तनिषा का रंग रूप भले ही सांवला था मगर मन की एकदम साफ।जो लोग उसे कम पसंद करते फिर भी वह उनके हर काम के लिए तत्पर रहती।
कुकिंग,पेंटिंग, सिलाई, बुनाई हर कार्य में निपुण। वह अक्सर जेठानियों और ननदों को कुछ न कुछ बनाकर भेजती रहती।
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