निशि बहू ....दवा का समय हो गया है .. सुनैना जी के तीन चार बार आवाज देने पर भी जब बहू निशि नहीं आई तो थोड़ा चिंतित हो बह हिम्मत करके बिस्तर से उठीं और एक कदम कमरे से बाहर निकाला ही था कि पीछे बरामदे से निशि की फोन पर बात करने की आवाजें सुनाई देने लगीं।
लो फिर लगी है अपनी मां के संग मोबाइल पर बतियाने में।जाने क्या क्या #पट्टी पढ़ा रही होगी इसकी मां भी।इतनी मगन है कि बीमार सास को भूल गई।सास की दवा का समय हो गया कैसे याद रहेगा।यहां की सारी सूचना दे रही होगी अपनी मां को।कितने जतन कर लो बहू कभी बेटी बन ही नहीं सकती। दोनों मिल कर यहीं की बुराई में लगी होंगी।बहू की मां को सोचना चाहिए बेटी ससुराल में है पता नहीं क्या पट्टी पढ़ाए जा रही है ।मेरे ही विरुद्ध भड़का रही होगी....सोच कर बीमार सुनैना जी का रक्तचाप बढ़ने लगा था।
मां जी लीजिए दूध.... सॉरी मां जी थोड़ी देर हो गई निशि की मीठी आवाज से वह चैतन्य हुईं।
कोई बात नहीं बहू .. कुछ जरूरी काम आ गया होगा तुम्हे भी दूध का गिलास लेते हुए व्यंग्य से कहा उन्होंने।
वो मां से हल्दी और सोंठ वाला दूध बनाने की विधि पूछ रही थी ।मां कह रहीं थीं दवा पानी के साथ नहीं हल्दी सोंठ वाले दूध के साथ ही देना आपकी बीमारी में बहुत फायदा करेगा ।पीकर बताइए कैसा टेस्ट है सरलता से कह निशि तुरंत उन्हें दवाइयां निकाल कर देने लगी।
बहू की सरलता और अपने प्रति ख्याल देख सुनैना जी अपनी सोच पर शर्मिंदा हो गई आंखे भर आईं।
बहुत स्वादिष्ट बना है बेटा अपनी मां को मेरी तरफ से धन्यवाद कह देना वात्सल्य भाव से कह सुनैना जी ने मन ही मन माफी मांग ली थी।
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