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अमावस

 रिद्धि घर से निकलते समय अपने गहने साथ नहीं लाना चाहती थी,पर सौरभ ने जोर देकर कहा था लाने को।आदत नहीं थी मम्मी की आलमारी खोलने की,तो जैसे ही लॉकर खोलने गई धड़ाम से आवाज आई।सकपका कर जल्दबाजी में गहनों का बक्सा निकालकर अपने कॉलेज के बैग में डालकर पलटी ही थी कि मम्मी भागती आई और पूछा"क्या हुआ बेटा?यह आवाज कैसी?अरे!तुझे कोई साड़ी चाहिए क्या कल पहनने को?"

रिद्धि डर गई थी,लगा चोरी पकड़ी गई।सहमकर बोली"अरे मम्मी!मैं क्यों साड़ी पहनूंगी?करवा चौथ तो आप करेंगी कल,मैं थोड़े ही करूंगी।मैं तो आपकी साड़ी देखना चाहती थी,सब मैचिंग है कि नहीं।"

मम्मी ने सर पर हांथ फेरकर कहा"बस -बस,यह साल आखिरी है तेरा।डिग्री मिलते ही लड़का देखना शुरू कर दूंगी।ब्याह के बाद करना नौकरी।पापा के रिटायर होने से पहले तेरे हांथ पीले कर दूं, तो शांति मिलेगी मुझे।देखना तेरे पहले करवा चौथ में तेरे लिए क्या-क्या तैयारी करूंगी।चांद के साथ तेरी सुंदरता ही चमकेगी पूरे आसमान में।पूनम का नजारा होगा। "

"धत्त!!!!!"कहकर रिद्धि ने नज़रें झुका लीं। मम्मी हंसती हुई कमरे से निकल गई तो वह सोचने लगी।बचपन से मम्मी को दुल्हन की तरह सजते -संवरते देख कर जब करवा चौथ का व्रत करने की इच्छा जताया करती थी,तो मम्मी हंसकर कहती"शादी के बाद करते हैं पगली यह व्रत,अपने पति की मंगल कामना के लिए।तू जल्दी-जल्दी बड़ी हो जा,दुल्हन बन जा।खूब सजना फिर।"मम्मी की बात सुनकर उनकी गोद में मुंह छिपा लेती थी।

सौरभ को भी कल ही का दिन मिला था,शादी करने के लिए।इस बार मम्मी को सजी-संवरी नहीं देख पाऊंगी।पूजा के समय क्या मम्मी अकेली सब मैनेज कर पाएंगी? मोहल्ले की औरतें आकर जब मेरे बारे में पूछेंगी,तो क्या जवाब देंगी मम्मी?और पापा!वो यह बदनामी सहन कर पाएंगे क्या?उफ्फ!!!!सौरभ भी ना,एक-आध साल और नहीं रुक सकता था।बड़ी दुविधा में डाल दिया था उसने यह कहकर कि' कल नहीं तो ,कभी नहीं।

कपड़े भी तो लेना है,आधार कार्ड,पैन कार्ड सब रखना होगा। पासपोर्ट का तो पूछा ही नहीं मैंने,रिद्धि सोच ही रही थी कि नीचे से बाइक का हार्न बजने लगा बार -बार।सौरभ आ चुका था। मम्मी रसोई में कल के पकवानों की तैयारी कर रही थी।पापा ऑफिस से बाजार गए होंगे,आए नहीं थे।सौरभ का फोन भी आने लगा,तो रिद्धि  मम्मी -पापा की फोटो और बैग हांथ में लेकर चुपचाप बाहर निकल गई।

सौरभ ने देखते ही चहककर पूछा"गहने रख लिएं हैं ना?कैश है ना पास में?"

रिद्धि को सौरभ का यह रवैया पसंद नहीं आया,तो उसने समझाया कि नई नौकरी है उसकी। तनख्वाह अगले महीने ही मिल पाएगी,इसलिए पूछा।बाइक सीधे एक होटल में रोकी सौरभ ने।कमरा पहले से बुक था।शादी तो कल होनी थी,फिर आज ही एक कमरा क्यों लिया दोनों के लिए,पूछा उसने।सौरभ ने बताया बहुत महंगा है कमरा।रात को सौरभ अपनी हदें पार करने की सोच ही रहा था ,तभी रिद्धि ने चिल्लाकर कहा"खबरदार सौरभ,जो मेरी इज्जत से खेलने की कोशिश की।हम पहले शादी करेंगे,फिर कोई संबंध बनाएंगे।मैं ऐसी -वैसी लड़की नहीं हूं।तुमसे प्यार करती हूं,इसलिए अपने मम्मी -पापा की मर्जी के खिलाफ चली आई तुम्हारे साथ।कल हम शादी करके सीधे मम्मी -पापा के पास चलेंगे।करवा चौथ में मम्मी मुझे दुल्हन की तरह देखकर जरूर माफ कर देंगी।"सौरभ बेशर्मी से हंसता हुआ बोला"बड़ी इज्जत दार बन रही है तू। इज्जत वाली होती तो ,अपने मम्मी -पापा को धोखा नहीं देती।एक तीन साल के रिश्ते के लिए,अपने मां-बाप से रिश्ता नहीं छोड़ती तू।मैंने जबरदस्ती नहीं की थी तुझसे,तू अपनी मर्जी से आई है।अब अगर वापस जाना भी चाहे तो जा पाएगी क्या?रात बहुत हो गई है।पुलिस के पास गई तो भी,मेरा कुछ नहीं होगा।बालिग है तू।"सौरभ की बातें सुनकर सन्न रह गई रिद्धि।उसे थप्पड़ मारने के लिए उठी तो,धक्का देकर वह बैग लेकर निकल गया।दरवाजा भी बाहर से बंद कर दिया था।रोने-चिल्लाने की आवाज बाहर तक पहुंच नहीं सकती थी,यह कमरा आउटर में था। रिद्धि ने फोन ढूंढ़ने की कोशिश की तो याद आया,बैग में ही रह गया था। रोते-रोते कब सो गई पता ही नहीं चला।सुबह दरवाजा खोलकर होटल के मैनेजर के साथ पुलिस को देख, रिद्धि दहाड़ मारकर रोने लगी।

घर का पता पूछकर जब पुलिस वालों ने घर पहुंचाया तो देखा, मम्मी -पापा खून के आंसू रो रहे थे।पूरा मोहल्ला कोस रहा था उसे।जाकर सीधे पापा के पैरों में गिर गई रिद्धि। मम्मी ने देखा तो झपटकर गले से लगा लिया।पापा ने पुलिसवालों और होटल के मैनेजर को हांथ जोड़कर धन्यवाद करते हुए कहा"आपने हमें ज़िंदगी भर खून के आंसू बहाने से बचा लिया।भगवान आपका भला करे।हमें हमारी बेटी जिंदा लौटाने के लिए बहुत बहुत आभार।"

शुभ्रा बैनर्जी 


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