रिश्ते पर भारी पैसा

 “बहुत दिन हो गए चलो कनु से मिल आते है… ऐसे भी कौन सा हमारा अब यहाँ आना जाना होगा…यहाँ आए है तो सोच रहा हूँ मिल लेना चाहिए ।” निहाल नीति से बोला 

“ देखिए आपकी भतीजी है आपका उसके लिए प्यार समझ आता है पर क्या उसको नहीं लगता चाचा चाची यहाँ आएँ हुए है तो वो उन्हें मिलने आ जाए या अपने घर ही बुला लें… दो दिन से शादी के लिए होटल में रूके हुए है उसको भी पता है हम यहाँ आए हुए है फिर भी उसने एक कॉल तक नहीं किया…अमीर घर में ब्याह होते ही उसकी आँखों पर चर्बी चढ़ गई है… ब्याह से पहले चाचा चाची बड़े अच्छे लगते थे उसकी हर माँग जो पूरी करते थे अब अमीर घर की बहू बन कर इतराने लगी हैं… फोन करना तो दूर की बात हो गई ..आपको जाना है जाइए मैं नहीं जाऊँगी ।” नीति ने सपाट लहजे में बोला 

निहाल के बहुत बोलने पर जब वो दोनों कनु के घर उसे सरप्राइज़ देने का सोच कर चले तो गए पर दरवाज़े पर खड़े हो कर बहुत देर तक घंटी बजाने के बाद दरवाज़ा खुला… सामने उनके घर काम करने वाला किशोर खड़ा था आश्चर्य से देखते हुए बोला,” किससे मिलना है?”

“ कनिका से मिलना है उसके चाचा चाची है।” निहाल ने कहा 

“ ओहह भाभी जी से मिलना है एक बार पूछ लेता हूँ ।”कहते हुए किशोर ने इंटरकॉम पर फोन किया और सिर हिलाकर कुछ सुनने लगा

“ भाभी जी तो घर पर नहीं है वो लोग अभी कहीं निकल गए है बोल रहे हैं आप कल मिलने आ जाए।”  किशोर ने कहा

तभी निहाल के कानों में कनु की किसी से फोन पर बात करने की आवाज सुनाई दी,” माँ क्या है ये चाचा चाची मुँह उठाकर यहाँ क्यों चले आए ..प्लीज़ इनसे बोल दो मेरे ससुराल ना आए… अब मेरी शादी हो गई है मेरी पहचान रईसों में होती है क्या सोचेंगे लोग मेरे घर वाले ऐसे गरीब से हैं ।”

निहाल को ये हल्की सी आवाज सीने पर एक भारी पत्थर सा एहसास करवा रही थी… वो सोच रहा अब ऐसे रिश्ते को सँभाला नहीं जा सकता जहाँ आँखों पर चढ़ी चर्बी में अपने  परिवार वाले भी दिखाई ना दें ।

✍️रश्मि प्रकाश 


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