हम तो किलियर बोलते हैं

 आओ आओ जीजी बड़ी देर कर दी कहां अटक गई रहीं सुनैना ने मालती को आते देख जोर से कहा तो सगाई कार्यक्रम में एकत्र सभी महिलाएं उसी तरफ़ देखने लगीं।

अब का बताए आ ही रहे थे कि दो छोरे जो हमाई बेटी सुची के साथ कॉलेज में पढ़ते हैं आ गए बोले सुची से मिलना है नोट्स लेने हैं।हमने तो वहीं डपट दिया दोनों को के आज के बाद सुची से मिलने आए तो खैर नहीं ... बस इसी में देर हो गई मालती बताने लगी।

अरे जिज्जी सुची नहीं शुचि...लो जमाना कहां पहुंच गया तुम अपनी लड़की पे इत्ती पाबंदी लगाती हो सरला ने आंखे फैला  कर कहा।

अरे जमाने की ना बताओ हमको ।हमारी बेटी इस जमाने की है ही नहीं सीधी सादी गऊ लड़की है इतनी आज्ञाकारी है हमारी कि का बताएं ।हमारी मर्जी के बिना क्या मजाल जो एक पैर भी घर से बाहर निकाल ले।पर ये आज कल के लड़के सर्वनाश होते हैं।उंगली पकड़ के सीधे कमर ही पकड़ लेते है ।सत्यानाश हो उनके मां बाप का जो ऐसे अभागे लड़के पैदा किए लड़की देखी नहीं की....

बस करो जीजी मांगलिक अवसर पर ऐसे कुबोल ना बोलो सुनैना ने धीरे से हाथ दबाते हुए कहा।लो अक्षत पुष्प फेंको लड़के ने अंगूठी पहना दी।

अब अपनी तो आदत है किलियर बोलने की क्या करें गर्व से कहती मालती फूल की पंखुड़ियां सामने फेंकते हुए बगल से जा रहे कटलेट वाले से दो कटलेट लेकर खाने लगी।

इतने रईस है पर खाना एकदम बेकार .. थू..।मक्खीचूस हैं।सारा रुपया पतलून की जेब में।कोई स्वाद ही नहीं है कटलेट में। इससे अच्छा तो हम अपनी बिटिया के हैप्पी बर्थडे में बना लेते है मुंह सिकोड़ कर जीजी कह उठी।

उहूं जीजी तुम भी कहां खाने में लगी हो वो सामने देखो ।हीरे की अंगूठी है लगता है कमला ने आंख फाड़ कर कहा।

हां तो होगी ही दो नंबर की कमाई जो है बाप की। लड़की तो करिया भूसा कम से कम अंगूठी ही चमक रही है।अरे इस लड़की के खानदान का भी पूरा पंचांग हमारे पास है इसकी मां भी एकदम करिया ..एक ही ऑफिस में काम करते थे बस फंसा लिया... लड़की में भी वहीं चरित्तर आए हैं देखना....

बस करो जीजी तुम्हारी जुबान तो #विष ही उगलती है  सुनैना ने फिर से टोका।

विष नहीं किलियर बोलते हैं हम तो ।किसी को बुरा लगे चाहे भला समझी जीजी ने फुर्ती से चौथा कटलेट निगलते हुए कहा।

तभी जीजी का पड़ोसी दौड़ते हुए वहां आ पहुंचा।

जिज्जी ओ जीजी..अरे गजब हो गया तुम्हारी लड़की सूची...

क्या हुआ सूची को जीजी सहित सभी ने चौंक कर उसकी तरफ देखा।

सुची... सुची घर छोड़ कर चली गई है ये चिट्ठी भेजी है तुम्हारे नाम .. लो...हांफते हुए उसने बात पूरी की और चिठ्ठी जीजी की ओर बढ़ा दिया..!!

हमें तो पता था यही होगा इतनी पाबंदी लगाती थीं शंका करती थीं अपनी इतनी बड़ी बिटिया पर... चारों तरफ सब बोल रहे थे लेकिन...

कि लियर बोलने वाली जीजी की बोलती अब ...बंद हो चुकी थी।


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