महंगा गिफ्ट

 शाम के सात बज रहे थे। रेखा बालकनी में खड़ी थी, सामने वाली पड़ोसन शालिनी अपनी नई साड़ी में इतराती हुई रमा जी के घर जा रही थी। साड़ी की चमक देखकर रेखा के चेहरे पर हल्की सी झुंझलाहट आ गई। उसने झट से अंदर आते हुए कहा —

“जानते हो रवि...? कल हमारी पड़ोसन शालिनी एक नई साड़ी पहनकर रमा जी के यहां पूजा में आई थी... बड़ी शान से बता रही थी कि साड़ी 18,000 की है! और सुनो — सबके सामने कह रही थी कि उसके पति ने ही गिफ्ट दी है। ऐसे इतरा रही थी मानो कोई कीमती जवाहरात पहन लिए हों!”

रवि अखबार से नजर उठाए बिना बोला,
“तो इसमें दिक्कत क्या है? उसका पति देने में खुश है तो अच्छा ही है ना?”

रेखा ने गुस्से से कहा,
“अच्छा ही है...? आप होते तो मैं भी बता देती कि मेरे पति भी किसी से कम नहीं!”

रवि ने हँसते हुए पूछा,
“अच्छा...? मेरी भी तारीफ कर देतीं?”

रेखा ने हाथ नचाते हुए कहा,
“हाँ, और नहीं तो क्या! आखिर मेरे पति कोई मामूली आदमी हैं क्या? पिछले महीने रिस्ट वॉच दी, उससे पहले प्रेशर कुकर और अब तो नया फोन भी देने वाले हैं...”

रवि ने अखबार नीचे रखते हुए चौककर कहा,
“नया फोन...? अरे बस इतना ही सोचा तुमने?”

रेखा की आँखें चमक उठीं,
“क्या मतलब? और कुछ सोच रखा है आपने?”

रवि ने गंभीर चेहरा बनाते हुए कहा,
“हाँ, मैंने तो बहुत आगे तक सोच लिया है। देखो, मैं ये घर बेच दूँगा... फिर तुम्हारे लिए सोने के गहने, साड़ियाँ, आईफोन, सब कुछ खरीद लूँगा। मेरे लिए तो तुम्हारा प्यार ही काफी है। तुम साथ रहो, तो मैं सड़क पर भी रह लूँगा।”

रेखा का चेहरा पलभर में उतर गया।
“क्या...? घर बेच देंगे...? आप पागल हो गए हैं क्या?”

रवि ने मुस्कुराते हुए कहा,
“क्यों, तुमने तो कहा था कि बाकी सब औरतें अपने पतियों की तारीफ करती हैं, तो मैं भी तो कुछ बड़ा करना चाहता हूँ।”

रेखा झेंप गई। कुछ देर चुप रही, फिर धीरे से बोली,
“आप भी ना... कभी-कभी ऐसी बातें करते हैं कि दिल भर आता है। अब आपका प्यार क्या मुझसे छुपा है? मुझे दिखता है कि आप मुझसे कितना प्यार करते हैं... मुझे किसी चीज़ की तुलना करने की ज़रूरत नहीं।”

रवि ने नकली गंभीरता से कहा,
“सच कह रही हो ना? वरना कल मैं गाड़ी बेचने का सोच रहा था, ताकि तुम्हारे लिए हीरे की चेन ले आऊं।”

रेखा झट से बोली,
“नहीं, नहीं! मुझे कुछ नहीं चाहिए... आप बस ऐसे ही मुस्कुराते रहिए, वही मेरे लिए सबसे कीमती है।”

रवि अब खुद को रोक न पाया, मुस्कुराते हुए बोला,
“देखा... आज मेरे शब्दों ने पैसे बचा लिए!”

रेखा ने नकली गुस्से में तकिया उठाकर मारा,
“तो मतलब ये सब नाटक था?”

रवि हँसते हुए बोला,
“नाटक नहीं, आत्मरक्षा थी। क्योंकि जो हंसा, वो फंसा — और मैं अब समझ गया हूँ कि पत्नी से तुलना की चर्चा घर की सबसे महंगी गलती होती है!”

रेखा भी अब मुस्कुरा रही थी। उसने रवि के हाथों में चाय का कप थमाया और धीरे से बोली,
“जानते हैं, आपको किसी और की तरह दिखने की जरूरत ही नहीं। मेरे लिए आप वैसे ही सबसे अलग हैं।”

रवि ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा,
“बस यही बात याद रखना, वरना अगली बार मैं बोल दूँगा कि कार बेचकर मंगल ग्रह की सैर करा दूँगा।”

रेखा हँस पड़ी, और कमरे में फिर से वही पुरानी हँसी गूंज उठी —
जहाँ प्यार और समझदारी साथ हो, वहाँ तुलना अपने आप हार जाती है।


लेखिका : रोनिता कुंडु 


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