वेंकटरामन सुबह की चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे तभी अपनी चाय की कप लेकर वसंता भी वहीं आकर बैठ गई थी । वेंकटरामन ने कहा कि कल रात को तुम्हारे सोने के बाद सौरभ ने फोन किया था कि वह इंडिया वापस आ रहा है अपने बीवी बच्चों के साथ मिलकर यहीं रहेगा । वसंता खुश हो गई थी कि बच्चे साथ रहेंगे परंतु पति ने बताया था कि बेटे ने अपने लिए घर ढूँढने के लिए कहा है मैं वहीं घर देखने जा रहा हूँ ।
वसंता अपना घर उसका ही तो है वह अलग क्यों रहना चाहता है । हम इतने बुरे हैं क्या जो हमसे दूर जा रहा है । वेंकटरामन ने कहा कि मेरे माता-पिता भी बुरे नहीं थे परंतु तुमने भी तो उनसे अलग होकर अपना घर बनाया था । वसंता बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से लाए कहावत सुनी है ना तो फिर उन्हें आशीर्वाद दो कि ने जहाँ भी रहे खुश रहें । हँसते हुए कहा और वहाँ से बेटे के लिए घर देखने के लिए चले गए ।
के कामेश्वरी
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