रश्मि और वीर का विवाह हुए तीन साल हो चुके थे, और अब वे अपने छोटे से घर में खुश थे। वीर और रश्मि दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन घर में एक समस्या चल रही थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। रश्मि की छोटी बहन, मीरा, अक्सर रश्मि और वीर के घर आती थी। मीरा का स्वभाव कुछ अलग था, वह खुद को परिवार का हिस्सा नहीं मानती थी और हर छोटी बात में दखल देती थी।
रश्मि एक समझदार और शांत स्वभाव की लड़की थी, लेकिन मीरा की आदतों ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया था। मीरा का घर में आना-जाना सामान्य था, लेकिन वह हमेशा किसी न किसी बहाने से घर के कामों में हस्तक्षेप करती रहती थी। रश्मि को लगता था कि मीरा उसकी शादीशुदा ज़िंदगी में दखल दे रही है, और यह उसे अच्छा नहीं लगता था।
एक दिन, जब वीर ऑफिस से घर लौटे, उन्होंने देखा कि मीरा फिर से रश्मि और उसके घर में कुछ ज्यादा ही घुसपैठ कर रही थी। वह रश्मि से कह रही थी, "भाभी, मुझे लगता है, वीर भैया आपको ज्यादा तंग करते हैं। क्या आपको कभी अकेले रहने का वक्त मिलता है?" रश्मि ने इस सवाल को नजरअंदाज किया, लेकिन मीरा ने फिर कहा, "अगर तुम चाहो तो मैं वीर भैया को समझा सकती हूं। आखिरकार, भाई को बहन की बातों पर ध्यान देना चाहिए।"
यह सुनकर रश्मि को गुस्सा आ गया, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। रश्मि की सोच थी कि अगर उसने मीरा को जवाब दिया, तो बात और बढ़ जाएगी, और उसका घर की शांति भंग हो जाएगी। लेकिन मीरा को यह लगने लगा था कि रश्मि को अपनी जगह सही नहीं मिल रही है। वह अक्सर रश्मि से शिकायत करती और वीर को कभी-कभी ताना देती कि उसे अपनी पत्नी के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहिए।
रश्मि को ये सारी बातें भीतर-भीतर परेशान कर रही थीं, लेकिन एक दिन मीरा ने हद ही पार कर दी। वह रश्मि के कमरे में आई और कहा, "भाभी, मैंने वीर भैया से पूछा था कि क्या तुम्हें हमारी बातें सुनने में कोई परेशानी है। वह तो कहते हैं कि तुम किसी बात का विरोध नहीं करती हो, तुम तो बस एक अच्छा दिखावा करती हो।"
यह सुनकर रश्मि ने मीरा को गंभीरता से देखा और कहा, "तुमसे यह उम्मीद नहीं थी, मीरा। अगर तुम्हें लगता है कि मेरे और वीर के बीच कोई दिक्कत है, तो तुम मेरे सामने आकर बात कर सकती हो, न कि पीछे से ऐसे बातें फैलाना।"
मीरा हड़बड़ाते हुए बोली, "क्या भाभी, आप मुझे कुछ गलत समझ रही हैं। मैं तो सिर्फ आपके भले के लिए कह रही थी।" लेकिन रश्मि अब मीरा की बातों से तंग आ चुकी थी। उसने वीर को सब कुछ बता दिया और कहा, "वीर, तुम्हारी बहन अब हमारी ज़िंदगी में दखल देने लगी है। क्या तुम इसे समझा सकते हो?"
वीर ने रश्मि की बातों को ध्यान से सुना और फिर मीरा से बात की। "मीरा, क्या तुम्हें लगता है कि हमें अपनी ज़िंदगी जीने का हक नहीं है? अगर तुम हमारे बीच का मसला हल करना चाहती हो, तो इसके लिए तुम्हें सामने आकर हमसे बात करनी चाहिए। हमें हमारी ज़िंदगी जीने दो।"
मीरा ने देखा कि वीर और रश्मि के बीच की गलतफहमियाँ बढ़ने लगी थीं। वीर की बातों ने उसे अहसास दिलाया कि उसने बहुत बड़ी गलती की थी। मीरा ने रश्मि से माफी मांगी और कहा, "भाभी, मुझे नहीं पता था कि मैंने इतनी बड़ी गलती कर दी। मुझे अपनी बातों पर विचार करना चाहिए था।"
रश्मि ने मीरा को गले लगाकर कहा, "हम सब एक परिवार हैं, और हमें एक-दूसरे की इज्जत करनी चाहिए। कभी-कभी हम अपनी गलतियों से नहीं समझ पाते, लेकिन यह समय है कि हम एक-दूसरे को समझें और परिवार की शांति बनाए रखें।"
इसके बाद मीरा ने अपनी गलतफहमियों को दूर किया और रश्मि के साथ मिलकर घर के कामों में मदद करना शुरू किया। वीर और रश्मि ने भी अपनी ज़िंदगी को और बेहतर बनाने का संकल्प लिया और अब मीरा भी परिवार का हिस्सा बन गई, जो कि पहले से कहीं ज्यादा समझदार और जिम्मेदार थी।
इस घटना ने रश्मि और वीर दोनों को यह सिखाया कि कभी-कभी घर में छोटी-छोटी गलतफहमियां होती हैं, लेकिन उन्हें बात करके सुलझाना सबसे अच्छा तरीका होता है। परिवार में प्यार और समझदारी से ही हर समस्या का समाधान संभव है।
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