रिश्ता भाई - बहन के प्यार का

 शाम का समय था | सविता अपने घर के बरामदे में बैठी कुछ पढ़ रही थी की तभी दरवाज़े की घंटी बजी |उसने सोचा की पति होंगे और उठकर दरवाज़ा खोला तो आश्चर्य से उसकी ऑंखें खुली रह गयी और उसकी आँखों से आंसू बहने लगे क्यूंकि सामने खड़े थे उसके प्यारे भैया ,भाभी और पूरा परिवार जो की कुछ गलतफहमियों की वजह से उस से दूर हो गए थे | उसके मुहँ से बस इतना निकला आ सब यहाँ कैसे ?   

    फिर उसके भैया ने आगे आकर उसको गले लगाया और बोले कि मुझे माफ़ कर दे मेरी प्यारी बहन | कुछ गलत फ़हमियों कि वजह से हम आपस में झगड़ बैठे पर में तुमसे दूर बिलकुल भी चैन से नहीं बैठा |और दोनों एक दूसरे से मिलकर रोने लगे | माहौल थोड़ा ग़मगीन सा हो गया तभी उसकी भाभी आगे आयी और माहौल को हल्का करते हुए बोली कि अब दोनों रोते ही रहोगे या हमको भी मिलने डोज अपनी प्यारी ननद से फिर सभी बच्चे भी आगे आकर बुआ से मिले उनके पैर छुए और माहौल थोड़ा खुशनुमा हुआ |इतने में सविता के पति भी घर आ गए और सबको एक साथ देखकर बहुत खुश हुए |          

फिर सविता चाय नाश्ते का इंतज़ाम करने लगी उसके पति भी जल्दी से बाजार से खाने पीने का सामान ले आये सबने मिलकर एक साथ चाय का आनंद लिया और कुछ देर बाद सविता और उसकी भाभी ने मिलकर सबके लिए खाना  बनाया | सब खाना खाकर बातें करने लगे और फिर सोने चले गए |

   सविता कि आँखों में आज नींद नहीं थी वो याद करने लगी पुरानी बातें अपना बचपन अपना मायका |

     राजस्थान का के छोटा सा शहर जिसमे एक मध्यमवर्गीय परिवार था | जिसमें परिवार के मुखिया थे किशोरीलाल जो कि बहुत ही आदर्शवादी , मिलनसार ,सबकी मदद करने वाले  थे | सविता की माँ भी बहुत ही कुशल गृहिणी और धार्मिक महिला थी | दोनों के तीन बच्चे थे|   दो बेटे एक बेटी सविता | सविता के बड़े भाई का एक लाइलाज बीमारी से देहांत बहुत कम उम्र में ही हो गया था जिसकी वजह से सब बहुत टूट गए थे और ये आघात सहना बहुत ही कठिन था | फिर भी उसके पिता ने सबको हिम्मत दी | दोनों बच्चों को खूब पढ़ाया और अच्छे  घरों में दोनों की शादी भी कर दी | सब कुछ ठीक चल रहा था  सब अपने परिवार में खुश और मिल जुलकर प्यार से रहते थे पर उम्र का तकाज़ा और जवान बेटे की मृत्यु का सदमा ऐसा था कि किशोरी लाल जी बीमार रहने लगे और उनको कैंसर हो गया | अच्छे डॉक्टर्स का इलाज़ भी उनको बचा नहीं सका और वो स्वर्ग सिधार गए | इसके कुछ समय बाद ही सविता की माँ का भी देहांत हो गया | दोनों बहन भाइयों को भी बहुत दुःख हुआ पर उनके परिवार जनों ने दोनों को संभाला और जिंदगी पटरी पर आने लगी पर अभी दुखों का अंत नहीं था | कुछ गलत फहमियां दोनों के मन में पनपने लगीं और दोनों एक दूसरे से बहुत दूर हो गए और उनके रिश्तों में कड़वाहट आ गयी | उनके बीच के रिश्ते का पतला धागा टूटने लगा |

 पर भगवान को शायद कुछ और ही मंजूर था और भाई को अपनी बहन और बचपन का प्यार याद आने लगा | उसकोअपनी गलती का अहसास हुआ वह बहुत उदास और बेचैन हो गया और उसने कुछ निर्णय लिया और वो उसी पल उठा और अपनी पत्नी और बच्चों से बोला कि अभी हम सविता के घर जायेंगे | सब बहुत खुश हुए और उन्होंने सबके लिए खूब सारे उपहार और मिठाइयां आदि लिए और पहुंच गए सविता के घर |

पुराने दिन याद करते हुए सविता को भी नींद आ गयी |

   इस तरह सविता के भाई के बढ़प्पन और समझदारी से दोनों बहन- भाइयों के प्यार का रिश्ता टूटने से बच गया |

     हम सभी को चाहिए कि यदि कहीं झुक कर आपस का प्यार बना रहे तो कोई शर्म कि बात नहीं बल्कि महानता कि बात है क्यूंकि जीवन बहुत छोटा और कीमती है और ख़ुशी - ख़ुशी इसको जीना है |

               हेमलता गोयल


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