सच्चा प्यार

 " ये तुम क्या कह रहे हो चंदर.. कल तक तो तुम मेरे आगे-पीछे घूमते थे और आज मुझे पहचान भी नहीं रहे... ऐसा क्यों चंदर..बोलो चंदर..।" कहते हुए माया चंदर को झकझोरते हुए रो पड़ी।

" क्योंकि अब तुम्हारे पास दौलत नहीं है... तुम्हारे पिता की फ़ैक्ट्री बंद हो गई है.. अब तुम मेरे किस काम की..।" " तो क्या तुम्हारा मेरे साथ एक बनावटी रिश्ता था...।" माया चीखते हुए बोली तो चंदर हा-हा करते हुए हँस पड़ा और किसी अन्य लड़की की कमर में हाथ डालकर चला गया। घर आकर माया तकिये में मुँह छुपाकर फूट-फूटकर रोने लगी। मनीष उसे निस्वार्थ चाहता था लेकिन उसने चंदर के झूठे प्यार के आगे उसके प्यार की कदर नहीं की।" माया...।" अचानक मनीष की आवाज़ सुनकर वह चौंकी।" तुम यहाँ..।"

" हाँ बेटी.. मैं ही इसे लेकर आई हूँ। सच्चा प्यार दिल से होता है, दौलत से नहीं और मनीष ही तेरा...।" माँ ने कहा तो वह " आइ एम सॉरी मनीष..। "कहकर अपने मनीष के गले लग गई। 

विभा गुप्ता


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