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ये भी कोई काम है !

 आज सुबह जैसे ही अक्षरा और रमन की नींद खुली, कुछ सन्नाटा सा लगा। न मम्मी की आवाज न पूजा की घंटी और न ही कोई शोर, उठो उठो दस बजने वाले हैं।

आखिर माजरा समझने के लिए दोनों बिस्तर से निकल आए। देखा ,मम्मी हॉल में बैठ कर अखबार पढ़ रही हैं।

उन्होंने पूछा ,मम्मी आपने आज हमें उठाया नही!

भगवान की पूजा भी नहीं हुई।नाश्ता भी नहीं बना  न ही चाय की खुशबू आई ।बात क्या है?

मम्मी ने गम्भीर मुद्रा में कहा ,क्योंकि आज भगवान ने मुझसे कहा ,इन्हें सोने दो।पूजा बिना घण्टी बजाए कर लो।सो मैंने कर ली।

उन्होंने आगे कहा ,सोना आवश्यक है ,और कुछ नहीं ,फिर मेरे हाथ का बना हुआ नाश्ता व खाना पसंद भी नहीं आता। इसलिए आज कोई काम नहीं होगा।

इतना सुनते ही दोनो के चेहरों का रंग उड़ गया। वे कुछ नहीं बोल पा रहे थे।कुछ उपाय भी नहीं सूझ रहा था मम्मी को मनाने का।

अब तो पापा भी वहाँ आ गए।आते ही बोले,अरे आज आप लोग अपने आप उठ गए। बहुत अच्छी  बात है।अब चलो अपनी पसंद का चाय नाश्ता भी अपने आप बना लो।

दोनों जड़वत बैठे रह गए क्योंकि उन्हें तो कुछ बनाना आता नहीं था।

अक्षरा और रमन सोच में पड़ गए, आज तो इज्जत बचानी ही पड़ेगा। कई बार वह मम्मी से कहते थे, खाना बनाना भी कोई काम होता है क्या, कोई भी बना सकता है। जरूरत पड़ेगी तो हम भी बना लेंगे, आजकल तो यूट्यूब सब सीखा देता है।

चलिए नाश्ते में तो ब्रेड बटर खा लेते है, पर आज खाना हम ही बनाएँगे। हां, मम्मी, सबलोग दाल चावल सब्जी खाने के लिए तैयार रहें, रोटी के लिए तामझाम कौन करेगा।

वाह आज दोनो रसोई में पहुँचे। "सुनो, यूट्यूब खोलो, और बैगन टमाटर की सब्जी की रेसिपी निकालो। तभी लाइट चली गयी, मोबाइल कनेक्ट नहीं हो पाया। दाल मैं कुकर में चढ़ाती हूँ। जल्दी से अलमारी खोली, नमक और हल्दी डालकर कुकर का ढक्कन लगाया। रमन फटाफट बैगन काटने में लग गए। अक्षरा ने एक तरफ चावल चढ़ा दिया।

किसी तरह दोनो ने अपने अंदाज से सब्जी बना ली। और मन ही मन बहुत खुश हो लिये, अरे वाह, आइये मम्मी पापा भोजन तैयार है। सब खुशी से डाइनिंग टेबल के पास आये।

पहला कौर पापा ने मुँह में डाला, और पापा ने बुरा सा मुँह बनाया। अरे नमक नही डाला क्या, ये दाल में सफेद क्या है, फिर मम्मी ने सब्जी चखी, इतना तेल, और इतनी सफेद गाढ़ी सब्जी, क्या डाला है तुमने। डिब्बा दिखाओ।

अक्षरा जो डिब्बा लेकर आयी, उसको देखकर सब हंस पड़े। अरे ये तो सूजी है। सबमें उसने नमक की जगह सूजी डाली थी।

सब भूखे थे, इसलिए मम्मी ने जल्दी से सब सुधारा, और भोजन पूरा हुआ।

दोनो ने मम्मी के पैर छुए, मम्मा, आज से रसोई हफ्ते में एक दिन हमारे जिम्मे होगी।

स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़


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