कूल पति देव

 नैना और रवि की शादी को दस दिन हुए थे और अब दोनों की छुट्टी भी खत्म हो गई थी। एक हफ्ते कश्मीर घूमकर आने के बाद दोनों घर सही करने और गृहस्थी का सामान जुटाने में व्यस्त रहे। नैना ऑफिस से आकर सोफे पर बैठी ही थी और उसे याद आया कि आज खाना घर पर ही बनाना है। अभी तक तो दोनों बाहर खा कर काम चला रहे थे लेकिन बाहर का खाना खा कर पेट तो भर जाएगा पर मन नहीं। नैना ने फोन लिया और अपनी माँ को पूछने लगी कि वह खाने में क्या बनाए?

नैना की माँ ने नैना को रवि की पंसद का खाना बनाने की सलाह दी। नैना फोन रख कर सोचने लगी कि रवि को क्या पंसद है? नैना अपने हनीमून की यादों में खो गई।

नैना और रवि की अरेंज मैरिज थी और दोनों ही दिल्ली में नौकरी करते थे। शादी के बाद वक्त न होने की वजह से दोनों जल्दी जल्दी में घुमने निकल गए और कश्मीर जैसी सुंदर वादियों में अपने प्यार को, अपने जज्बातों को एक दूसरे के आगोश में खोजते खोजते कब वापस आ गए पता ही नहीं चला।

नैना अभी सोच ही रही थी कि डोर बैल बजी। नैना ने दरवाजा खोला तो सामने से रवि दोनों हाथों में कुछ सामान लिए सीधा रसोई में पहुँचा। नैना भी पीछे पीछे रसोई में आ गई। रवि बोला "नैना ये सामान निकाल कर रखो मैं कपड़े बदल कर आता हूँ।"

नैना सामान निकालने लगी तो उसमें पनीर, टमाटर और कुछ और सब्जियां थे।

रवि ने रसोई में आकर नैना के दोनों गालों पर प्यार से हाथ रखा और बोला "बताएं इस घर की और मेरे दिल की शहजादी क्या खाना पंसद करेंगी?"

नैना को यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी शादी जिस इंसान से हुई है वह इतना प्यारा और समझदार है। नैना ने कहा, "आप क्यों परेशान होते हैं मैं खाना बना लूंगी।"

रवि ने प्यार से नैना के माथे पर किस करके कहा, "ठीक है, फिर हम दोनों मिल कर खाना बनाते हैं।"

नैना भी मान गई और दोनों खाना बनाने लगे। नैना मन ही मन सोच रही थी कि शादी से पहले कैसे खाना बनाने के लिए माँ ने स्पेशल कुकिंग क्लास कराए थे। उन्हें क्या पता था कि नैना को कूल पतिदेव मिलने वाले हैं जो नैना का साथ रसोई तक में निभाने को तैयार हैं।

- प्रीति सिंह


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