साँच को आंच नहीं

 सीमा के दिल दिमाग में आज एक हलचल सी मची हुई थी, सोच की लहरें हिचकोलें मार रही थी ,,,दिल कह रहा था सच कह दूँ लेकिन दिमाग हालातों को देखते हुए सच कहने से रोक रहा था। इसी उधेड़बुन में कब आँख लग गई , पता ही नहीं चला।

दरवाज़े की घंटी बजने से सीमा की आँख खुली तो देखा दुपहर के 3 बज गए हैं ,सीमा ने जल्दी से जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने कामवाली खड़ी थी।  सीमा ने उसे अंदर आने का रास्ता देते हुए काम समझाया और वापस कमरे में चली गई।  

सीमा के मन में विचारों का आना जाना जारी था तभी कामवाली राधा ने आकर सीमा से चाय का पूछा , सीमा के हाँ करने पर राधा चाय बनाने चली गई। 

कुछ देर बाद सीमा के कमरे में चाय लेकर राधा आई , राधा ने चाय का कप सीमा को पकड़ाया और उसे सारा काम होने का कहकर जाने ही लगी थी कि उसने महसूस किया कि आज सीमा कुछ परेशान सी है 

चूँकि राधा कई सालों से सीमा के घर काम कर रही थी इसलिए वो उसके साथ घुल मिल गई थी और दोनों आपस में काफी बातें किया करती थी , इसलिए राधा ने सीमा से उसकी परेशानी की वजह पूछी तो सीमा रो पड़ी ,मानो सीमा के सब्र का बाँध टूट गया हो और मानों सीमा यही चाह रही थी कि कोई उसके मन की परेशानी पूछे , उसकी चुप्पी की वजह पूछे ,,,


राधा एकटक सीमा को देख रही थी , उसने सीमा को जी भर कर रोने दिया , सीमा का मन हल्का होते ही उसने राधा से अपने दिल की परेशानी कहनी शुरू की। 

सीमा ने राधा को बताया कि कई दिन से उसके बॉस का बर्ताव उसके साथ गलत है और वो किसी तरह से खुद को बचाये हुए है , इसलिए वो नौकरी पर भी नहीं जा पा रही क्योंकि अब वो वहां पर असहज महसूस कर रही है , लेकिन बॉस उसे लगातार तंग कर रहा है और कह रहा है कि अगर उसने उसकी बात नहीं मानी या उसके खिलाफ़ किसी से कुछ भी कहने की कोशिश भी की तो वो उसे चोरी के इलज़ाम में फंसा देगा, साथ ही उस पर गबन का इलज़ाम भी लगाएगा और इस सबके लिए उसने सीमा के खिलाफ झूठे सुबूत भी इकठे कर रखे हैं लेकिन सीमा के पास अपनी बेगुनाही या बॉस के खिलाफ कुछ सुबूत नहीं है। 


सीमा खुद को बॉस के चंगुल में फंसा हुआ देख रही थी जिसकी वजह से वो मानसिक तौर पर परेशान रहने लगी थी , फिलहाल वो ऑफिस नहीं जा रही थी लेकिन अब बॉस ने उसे ऑफिस आने के लिए भी मजबूर करना शुरू कर दिया था। 

'दीदी , आप उस कमीने की आवाज़ रिकॉर्ड कर लो या उसके मेसेज सेव कर लो तो आप के पास उसके ख़िलाफ़ सुबूत आ जायेंगे' , राधा ने सीमा से कहा. 

"नहीं राधा,  वो इस तरह से कोई फ़ोन या मेसेज करता ही नहीं जिससे ये लगे कि वो मुझसे क्या चाह रहा है , वो बहुत चालाक है , कोई सुबूत नहीं छोड़ता। 

"तो दीदी अब आप क्या करेंगी " राधा का स्वर चिंतित था। 

पता नहीं लेकिन उसके पास जाने के लिए तो कभी तैयार नहीं होऊँगी , मैं चाहती हूँ कि उसका सच सबको बता दूँ


लेकिन कैसे उसका सच सामने लाऊँ , कोई मेरी बात का विश्वास नहीं करेगा और अगर उसने मुझसे बदला लेने के लिए कोई इलज़ाम लगा दिया तो मैं कहीं की नहीं रहूंगीं। 

राधा कुछ देर सोच कर बोली, दीदी बड़े बुज़ुर्ग कह गए है कि *साँच को आंच नहीं* , अगर हम सच्चे हैं तो फिर कोई कितना भी बड़ा झूट क्यों न बोले तब भी हमारा छोटा सा सच भी उसके झूट को हरा देता है बस हमें खुद पर विश्वास होना चाहिए और अपने आप पर यक़ीन। 

राधा की इतनी बड़ी बड़ी बातें सुनकर सीमा उसे देखते ही रह गई ,और उसकी बातें सुनकर सीमा के अंदर एक हिम्मत जाग गई।  सीमा ने सोच लिया कि वो अब बॉस से या उसकी धमकियों से नहीं डरेगी और उसका सच सबके सामने लेकर रहेगी। 

सीमा ने राधा का धन्यवाद किया और उससे भी और खुद से भी वादा किया कि अब वो सच से पीछे नहीं हटेगी और किसी के झूट से नहीं डरेगी। 


अगले दिन सीमा एक नए विश्वास के साथ ऑफिस गई , सीमा को ऑफिस में देखकर बॉस की आँखों में एक चमक सी आ गई , उसे लगा कि सीमा ने उसकी बात मान ली है और इसलिए आज ऑफिस आ गई है , कुछ देर बाद उसने सीमा को अपने केबिन में बुलाया। 

 सीमा उसके केबिन में गई तो बॉस ने एक गन्दी हंसी हँसते हुए कहा "क्यों सीमा , आखिरकार तुम्हें मेरी बात माननी ही पड़ी न, " 

कौन सी बात सर , सीमा ने अनजान बनते हुए कहा ,. .. 

अरे , हमारे तुम्हारे एक होने की बात , और क्या ??? 

अच्छा वो , पर सर मैंने तो आपकी कोई बात नहीं मानी। 

सीमा, कान खोलकर सुन लो , अगर यहां नौकरी करनी है और इल्ज़ामों से बचना है तो तुम्हें मेरी बात माननी ही पड़ेगी।  


और अगर मैंने तुम्हारी बात न मानी तो , सीमा ने हुंकार भरते हुए कहा। 

तो, अंजाम तुम्हारे सामने होगा , बॉस ने घिनौनी हंसी हँसते हुए कहा। 


इतने में ऑफिस का सारा स्टाफ और बॉस की पत्नी उसके केबिन में आ गए , सबको यूँ देखकर सीमा का बॉस हक्का बक्का रह गया और उसके मुंह के शब्द मुंह में ही रह गए 

वो घबरा कर अपनी पत्नी की तरफ चोर नज़रों से देखने लगा। 


उसकी पत्नी आगे आई और एक झन्नाटेदार तमाचा उसके मुंह पर मारा और सीमा के पास आकर उसका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज अगर तुम घर आकर मुझसे सच न बताती ,तो मैं अँधेरे में ही रहती और इस शैतान के रूप को अपना भगवान ही मानती रहती।  

आज तुमने सच बताकर साबित कर दिया की *साँच को आंच नहीं होती* , इसने झूठे इलज़ामों का डर दिखाकर तुम्हें कमज़ोर बना दिया था लेकिन तुमने आज जो हिम्मत दिखाई और सब सच आकर मुझसे बताया , वो हर औरत के लिए एक मिसाल है।  

इसके किये की सज़ा तो कानून इसे देगा ही , आज मैं भी इससे हर रिश्ता खत्म करती हूँ , ये ऑफिस भी मेरा है , जिसे ये चला रहा था ,,आज के बाद इसका इस ऑफिस पर भी कोई हक़ नहीं , अब मैं ख़ुद ही इस ऑफिस को चलाऊंगी और तुम हमेशा की तरह ही इस ऑफिस का हिस्सा रहोगी। 

सीमा ने बॉस की पत्नी का धन्यवाद किया , और मन ही मन राधा का भी क्योंकि वो राधा ही थी जिसने उसे सबके सामने सच बोलने का हौसला दिया था ,उसके डर को मारा था। 

घर जाते वक़्त सीमा ने राधा के लिए एक बहुत ख़ूबसूरत तोहफ़ा खरीदा और तेज़ क़दमों से घर की तरफ़ बढ़ने लगी , चलते चलते उसके दिल से यही आवाज़ आ रही थी कि वाक़ई "साँच को आंच नहीं होती"।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ