*दौलत से उपर प्यार*

 भैया कल दोपहर की गाड़ी से पहुँच रहे है आपकी बहू और बच्चे भी आ रहे है...

बस यही खबर देने के लिये फोन किया था...

कल मिलते है ...पाय लागी।"

दिल के किसी कोने में छोटे भाई के आने की खुशी ने उछाह भरा लेकिन मकान जमीन के बँटवारे के संदेह ने उसे कुचल दिया कुर्सी पर निढाल होते सुरेश ने आवाज लगाई "अरे सुनती हो कल छोटे आ रहा है बहू बच्चे भी आ रहे हैं जरा रुकने का इंतजाम कर लेना...

"अब क्या होगा क्या मकान जमीन का हिस्सा दे दोगे.. आधी जमीन तो बाबूजी पहले ही बेच चुके है फिर अपना गुजारा कैसे होगा...

निर्मला ने चिंता जताते हुए कहा...

"अब आने तो दो फिर देखते हैं क्या होता है...

"और कब तक देखते रहोगे तुम्हें उन्हें आने से ही मना कर देना था...

रामदीन काका का बेटा शहर गया था तब छोटे भैया ने साफ साफ तो कहा था कि अगली बार आएंगे तो मकान जमीन का फैसला करेंगे ...

अगर छोटे भैया ने अपनी जमीन बेचने का कहा या तुमसे पैसे मांगे तो कहां से लायेंगे...

यहां अपना ही गुजारा मुश्किल है

कहते कहते निर्मला रुंआसी हो गई

छोटा भाई गांव आया छोटे के आने से घर में रौनक तो आ गई लेकिन बडे भाई और भाभी के मन मे संशय का बादल घुमड़ता रहा। और आज जब छोटे वकील के साथ घर आया और कागज पर दस्तखत करवाये तब भी सुरेश कुछ कह नहीं पाये...

छोटे ने कहा "भैया मैं तो नौकरी के कारण कभी गाँव में नहीं रहूँगा इसलिए यह जमीन मकान सब आपके नाम कर दिया है बस आपके दिल में मेरी जगह को मेरे ही नाम रहने देना.....

पेपर्स हाथों मे पकडे बडे भाई सुरेश की आँखे जहां भीगी हुई थी वही कही ना कही शर्म से झुकी भी हुई थी.....क्योंकि यहां दौलत से कहीं ऊपर स्नेह और प्यार जीत चुका था ...

एक दोस्त की सुंदर रचना


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