मां की परछाई

    बेटी आराध्या की स्कूल बस हमारे घर के बाहर से ही उसे लेकर जाती थी चूंकि हमारा घर सडक किनारे है तो बस वहां तक आ जाती थी अक्सर आराध्या की मम्मी उसे बस मे बिठाकर लौटती थी ...आज उसने मुझसे कहा-मोहन जी ....पता नही मगर अजीब सा है ...पिछले एक हफ्ते से हमारी आराध्या की स्कूल बस मे एक नया लडका आता है

मे-  हां तो....

पत्नी-जी ....आपको पता है ना बस मे सभी बच्चे अपनी मनपसंद सीटों पर बैठते है ...वो लडका आराध्या के पीछेवाली सीट पर ही होता है ..

मे -कुछ गंभीरता से -साफ साफ कहो राधिका ...बात कया है

पत्नी-जी ...वो मुझे बहुत गौर से देखता है ...कभी लगता है वो हमारे घर को देखता है ...कभी लगता है हमारे बगीचे को ...या पेड पौधों को ...पता नहीं ...पर अजीब है कुछ ....

मे हंसते हुए -कुछ भी ....अभी अपनी बेटी बहुत छोटी है और तुम ....बहुत बडी ...

पत्नी भी मुसकरा दी ...

अचानक कुछ दिन बाद पत्नी की तबीयत खराब थी सो आराध्या को मे बस मे बिठाने गया ...चूंकि मुझे राधिका की बात याद थी देखा तो एक मासूम सा बच्चा बिल्कुल आराध्या की उम्र का उसने मुझे देखा और कुछ मायूस होकर बैठ गया ....मे बेटी को बिठाकर वापस आ गया

और नियमित रुटीन से आँफिस चला गया ...

शाम को जब लौटा तो तबतक आराध्या भी टयूशन से लौटी थी अभी राधिका मुझे चाय दे ही रही थी की आराध्या बोली-मम्मी ...मेरी बस मे मेरे पीछेवाली सीट पर जो बाँय बैठता है ना ...

राधिका ने घबराकर मुझे देखा और तुरंत आराध्या से पूछा -कया ...कया किया उसने...

आराध्या -मम्मी वो मुझसे बोला -दीदी ...आज आपके भी पापा आए आपको छोडऩे ....मैंने कहा हां...वो आज मम्मी की तबीयत खराब थी तो ...कयो ...

वो बोला -मेरे तो पापा ही आते है रोज ....कभी मम्मी नहीं ...कयोंकि मेरी मम्मी नही है ना ...भगवान के पास चली गई है पापा कहते है ...

लेकिन टीचर कहती है सबकी मम्मी एक जैसी होती है ...तो मे आपकी मम्मी मे अपनी मम्मी की परछाई देख लेता हूं ....

ये सुनते ही राधिका रो पडी और बोली - वो मासूम मुझमें मां की परछाई ढूंढ रहा था और मे ....

मैने उसे संभालते हुए कहा -सुनो ...जैसे वो मासूम तुम्हारे अंदर मां की परछाई ढूढता है वैसे ही तुम उसे एक मां की भांति प्यार से स्नेह भरी मुसकान से मिलो ...और हो सके तो बोला भी करो ...

क्योंकि स्नेह और ममता देनेवाला और लेनेवाला दोनों ईश्वर की रचनाओं का स्वरूप है ....

दोस्तों बच्चे केवल प्यार और स्नेह मांगते हैं

और यही प्यार और ममता उन्हें अच्छे भविष्य का रास्ता बताती है और मेरी नजर मे यही इंसानियत है

एक दोस्त की सुंदर रचना


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