जैनजी ऊपर के कमरे मे महीनों से उपेक्षित पड़ी माँ का हालचाल पूछने चाय का कप लेकर गए थे ..
वापस उतर कर आये तो पत्नी ने टोक दिया.. ...
"क्या बात है... आज तो माताजी का समाचार लिया जा रहा है ......क्या श्रवण कुमार बनने का इरादा जाग रहा है मन मे....
"अरे कुछ नही..वो पीछे वाली दुकान के लिए ग्राहक आ रहे हैं.....मैं तो बस दाम बढने की राह देख रहा था अब हस्ताक्षर तो मां का ही चाहिए होगा ना कागजों पर......इसीलिए एक प्याली चाय .....मक्खन वाली ...समझा करो ...जैनजी ने धीरे से असल बात पत्नी को बताई.. ...
शाम को ..... सोफे पर बैठकर जैनजी चाय की चुस्कियाँ लेने लगे.....और दिनों से आज चाय में दूध का स्वाद कुछ ज्यादा ही बढा हुआ था स्वाद कुछ अलग लगा तो पूछ बैठे..
"चाय किसने बनाई है आज ...
"आपकी बिटिया ने बनाई है.....पहली बार कुछ बनाया है जाकर रसोई में......वो भी अपनी इच्छा से पत्नी बताते हुए फूली नहीं समा रही थी.. ...
सचमुच...अरे वाह.....चलो बिटिया समझदार हो रही है..कहां है हमारी राजकुमारी.....भई इतनी अच्छी चाय का इनाम तो बनता है .. जैनजी प्रसन्नता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे..
यहीं है ....अपने कमरे में.....वो उसकी सहेली आई है ना पत्नी ने बताया..
कमरे में दोनो सहेलियाँ खिलखिला रही थी.. ...
"अच्छा सच बता.....ये चाय वाय का चक्कर क्या है.... सहेली ने कुरेदते हुए पूछा..
"अरे कुछ नही यार..वो कल रात वाली पार्टी मैं मिस नही करना चाहती,बस इसीलिए थोड़ा मक्खन लगाया जा रहा है..और क्या.....वैसे मैं और चाय ....
मगर चाय ही क्यों ....सहेली ने फिर पूछा तो बिटिया बोली ....यार तू नही समझेगी .....ये ऐसी वैसी चाय नहीं है मक्खन वाली चाय है मक्खन वाली .......मतलब जब मां बाप को बनाना हो तब बडे काम आती है ....खुद पापा भी यही करते हैं दादी के साथ ...काम निकलवाने को पिलाते हैं मक्खन वाली चाय .... बिटिया हँसने लगी..सुनकर उसकी सहेली भी हँस पड़ी....।
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वहीं दरवाज़े पर खड़े खड़े जैन जी और उनकी पत्नी सुन्न हुए जा रहे थे!! अनिल जैन
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