मां रखे बच्चो पर नजर

 चार्ज होने के लिए रखे अपने बेटे के फोन में नोटिफिकेशन ट्यून सुनकर पिता ने उसे उठाकर देखा।

किसी 'रिया खन्ना' नाम की लड़की का गुड मार्निंग मैसेज था। फोन को वापस रखकर वह रसोई में काम कर रही अपनी पत्नी नीला के पास पहुँचे।

वह कुछ कहते उससे पहले ही

नीलाने सवाल कर दिया "बोलो, क्या चाहिए..?"

"नही कुछ खास नही। मैनें अभी अर्पित के फोन में किसी रिया खन्ना का मैसेज देखा। तुम जानती हो उसे..?"

प्रत्युत्तर में नीला मुस्कुरायी और बोली "ये आजकल के बच्चे हैं अनिव जी। दो चेहरों वाले। हमें हर बात कहाँ बताते हैं।"

"मतलब..!" अनिल ने सिर खुजलाया।

"मतलब यह कि ये बच्चे घर वालों के लिए अलग होते हैं और बाहर वालों के लिए अलग। हमारा अर्पित भी कुछ ऐसा ही है। घर पर जितना सभ्य है सोशल साईट्स पर ठीक उसके विपरित।"

"मैं कुछ समझा नही।"

"वही तो। सारा दिन ऑफिस के कामों में ही जो उलझे रहते हो।" पति को एक उलाहना देते हुए नीला ने आगे कहा "आपको याद है मैं उसे उस दिन किसी आवश्यक काम का कहकर जबरन अपने भाई के यहाँ ले गयी थी। उस दिन वह किसी 'धर्म रक्षा सेना' की रैली में जाने वाला था।"

"वही रैली, जिसमें कुछ उपद्रवी लड़कों को गिरफ्तार किया गया था..!!'

"हाँ वही। और उस दिन जब मैनें उसे आपके पास ऑफिस भेजकर आपसे कहा था कि इसे किसी भी बहाने से तीन चार घंटे अपने पास रखना, उस दिन भी यह अपने फेसबुक फ्रेंड्स के साथ किसी 'जाति बचाओ आंदोलन' में जाने की फिराक में था।"

"अच्छा।" अनिल ने चौंकते हुए कहा। फिर कुछ सोचते हुए आगे पूछा "तो तुम कहना चाहती हो कि यह सब तुम्हें उसकी फेसबुक प्रोफाईल से पता चलता है।"और नही तो क्या..? इन सोशल साईट्स पर कुछ लोग बड़ी चालाकी से अपना स्वार्थ साधने के लिए हमारे बच्चों के दिमाग में जहर घोल रहे हैं। और हमें पता भी नही है।"

"तो फिर मुझे कैसे नही पता। मैं भी तो उसकी फ्रेंडलिस्ट में हूँ।"

"मैनें आपसे कहा था न कि ये दो चेहरों वाली पीढ़ी है। आप और मैं उसके साथ जिस प्रोफाईल में जुड़े हैं वहाँ हमारा अर्पित आदर्श बेटा है। मगर दूसरी प्रोफाईल में.."

"दूसरी प्रोफाईल में वह क्या करता है वो सब तुम्हें कैसे....!!"

"माँ हूँ मैं उसकी।" कहकर नीला ने पास रखा अपना फोन अनिल की तरफ बढाया।

फोन में खुले सोशल साईट के अकाउंट में 'रिया खन्ना' के नाम से 'लॉग ईन' देखकर उसने नीला की तरफ देखा और कहा "सचमुच तुम माँ हो उसकी.....दोस्तों मां कहने को एक छोटा सा शब्द मगर इस शब्द मे पूरी दुनिया समाई है मेरे कहने का मतलब आप सब अपने घरों में अनेकों रुप मे देख सकते है बहुत  सुंदर सोच   अनिल जैन


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