आज रोज से जल्दी सुरेश ने अपनी सब्जी की भारी टोकरियां उठाई और सब्जी मंडी की तरफ चल पड़ा।वह यहां नया आया था माहौल से परिचित नहीं हुआ था।
आज मार्केट डे था बहुत भीड़ थी ।अच्छी कमाई होने की आशा से वह आनंदित हो उठा।फुर्ती से कंधे का गमछा वहीं रास्ते के किनारे बिछा दिया और टोकरी की सारी सब्जियां निकाल कर गमछे पर सजाने लगा।
ओ भैया प्याज क्या भाव है ।एक किलो लेना था लेकिन तुम्हारे पास तो सब खराब हैं दो महिलाओं की तीखी आवाज सुन वह सक्रिय हो गया।
रुकिए मैं अच्छी छांट कर दे देता हूं कहता वह दूसरी टोकरी की तरफ पीठ कर पलटा ही था कि एक महिला ने चुपके से एक लौकी उठाकर हाथ के बड़े झोले में डाल ली और दूसरी ने फुर्ती से एक पपीता गायब कर दिया।सुरेश की तो दो आँखें उसकी पीठ पर भी थीं जिनमें सरेआम धूल झोंकना उसे असहनीय हो गया।
भैया जल्दी से प्याज तौलो कितनी देर लगा रहे हो हम दूसरी दुकान से ले लेंगे कहती दोनों जाने को उद्धत हो गईं।
नहीं नहीं ये ले जाइए तौल दिया मैंने कहता सुरेश प्याज देने लगा।
ये क्या भैया सामने सामने हमारी आंखों में धूल झोंक रहे हो तराजू ठीक नहीं है तुम्हारा इतनी कम प्याज तौल रहे हो और चढ़ाओ एक तो खराब खराब प्याज ऊपर से कम चढ़ा रहे हो कहते उन दोनों ने खूब सारी प्याज तराजू में डाल दी सुरेश के विरोध करने पर हल्ला करने लगीं अरे अरे देखो तो ये सब्जी वाला कैसे ठग रहा है हमें महिला समझ कर महंगा भी दे रहा है कम भी तौल रहा है जब तक सुरेश कुछ कहता कई लोग वहां जमा हो गए।
क्या है क्यों इन महिलाओं को ठग रहा है ।यहां नहीं चलेगा ये सब समझे लोग कहने लगे।भगाओ इसको।
मौके का फायदा उठा महिलाएं जल्दी जल्दी प्याज झोले में भर कर जाने लगीं।
अरे मैडम जी पैसा तो देते जाइए सुरेश ने जोर से कहा तो लोग महिलाओं को देखने लगे।
दे तो दिया है रुपया वो रखा है तराजू के पास सबको दिखाकर महिलाओं ने जोर से कहा तो सबकी नजरें रुपए पर पड़ गईं।अब तो सभी सुरेश को गुस्से से देखने लगे।
ये तो सिर्फ प्याज का है।लौकी और पपीते का भी देते जाइए सुरेश ने जोर से कहा तो महिलाएं सकते में आ गईं फिर चिल्लाने लगीं शर्म नहीं आती तुम्हें अंधे हो गए हो हमने तो सिर्फ प्याज ली है ये लौकी और पपीता का दाम क्यों मांग रहे हो।
सुन तुझे यहां सब्जी बेचनी है या नहीं अबकी भीड़ में से आक्रामक आवाजें आने लगीं।
हां भाई सब्जी भी बेचनी है और दाम भी वसूलना है।इन महिलाओं का झोला जांच कर लीजिए अगर लौकी और पपीता ना निकला तो आज से सब्जी बेचूंगा ही नहीं सुरेश ने दृढ़ता से कहा और झोले को छीन सबके समक्ष उलट लिया।तुरंत ही उसमें से प्याज के साथ लौकी और पपीता जमीन में गिर पड़े।
ये देख वहां इकट्ठे हुए सभी लोग सकते में आ गए ।अब महिलाओं को बच निकलने का रास्ता ना था।सबकी समझ में आ गया था कि असल में # आंखों में धूल कौन झोंक रहा था।सुरेश सभी सब्जियों के दाम ठसक से वसूल रहा था।
लतिका श्रीवास्तव
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