राजीव तुम ऐसा कैसे बोल सकते हो?तुमने ही तो मुझे प्यार सिखाया।तुम्हारे संग ही जीवन जीने के सपने देखे,तुम्ही कहते थे सपना जिंदगी भर तुम्हे सर आंखों पर रखूंगा।और आज-- आज कह रहे हो तुमसे शादी नही कर सकता।मेरे बारे में कुछ तो सोचा होता।मौत की सजा सुना दी बिना कसूर के।
मैं क्या करूँ सपना,मेरी माँ इस शादी को बिल्कुल भी तैयार नही है,मैं उनके विपरीत निर्णय नही ले सकता।सपना अपने इस प्रकरण को हम भूल जाते हैं।तुम भी अपने माता पिता की पसंद के लड़के से शादी कर लेना।
कितने निर्दयी और निर्लज्ज हो तुम राजीव,ये सब कहते तुम्हे जरा भी झिझक तक नही हुई।मुझे तो अपने से ही घिन्न आ रही है, मैं क्यों नही तुम जैसे दोमुहे को पहचान नही पायी।अंधी हो गयी थी मैं।
राजीव और सपना दोनो ने ही मिलकर साथ ही जीवन संग संग बिताने के सपने देखे थे।पूरे कॉलेज में दोनो की जोड़ी की धूम थी।साथ साथ अधिकतर समय बिताना और भविष्य के सपने बुनना, योजना बनाने में ही उनका समय बीत जाता।
कॉलेज समय मे ही सपना और राजीव एक दूसरे की ओर आकर्षित हो प्यार करने लगे थे।दोनो ने ही अपने अपने घर मे अपने इस प्यार के विषय मे बता दिया था।राजीव ने सपना को अपनी माँ तक से मिलवा दिया था।तब तो ऐसी कोई बात नही थी,मां ने सपना को खूब प्यार ही किया था।पढ़ाई के बाद राजीव ने जॉब कर लिया था तो सपना ने पीएचडी करने की योजना बनाई थी।पीएचडी पूर्ण होने ही वाली थी,जिसके बाद उनकी शादी की योजना थी कि आज राजीव ने शादी करने को ही मना कर दिया।ऐसा तुषारापात?सपना तो हक्का बक्का रह गयी। एक क्षण में ही नीरसता छा गयी।
भगवान के सामने खड़ी सपना बस भगवान की मूर्ति को देखे जा रही थी एकटक,मानो प्रश्न कर रही हो,भगवान मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? थकी हारी सी सपना घर वापस आ गयी,अब उसका चुलबुलापन उसी हंसी गायब हो चुकी थी।अपनी माँ से उसने बता दिया कि राजीव ने शादी को मना कर दिया है और अब वह कभी भी शादी नही करेगी।माँ को भी धक्का लगा,वह अपनी बेटी के मन के दर्द को समझ रही थी,पर बेबस थी।
यूँ ही समय व्यतीत होता जा रहा था।सपना की मौसी की लड़की की शादी थी,माँ सपना को जिद करके साथ ले गयी कि उसका मन बहलेगा।न चाहकर भी सपना माँ के साथ दिल्ली चली गयी।दिल्ली में उसकी मौसी की लड़की उसे लेकर कुछ खरीदारी के लिये करोलबाग ले गई।आते समय उसे राजीव अपनी माँ के साथ एक टैक्सी से उतरते दिखायी दिया।एक समय का उसका हीरो हैंडसम पर्सनालिटी के राजीव को उसने हड्डियों के ढांचे के रूप में देखा,वो तो उसकी माँ साथ थी तो उसने राजीव को पहचान लिया अन्यथा वह उस हालत में उसे पहचान भी नही पाती।राजीव की यह हालत देख सपना भौचक्की रह गयी।वह अपने को रोक नही पायी।वह उस ओर दौड़ गयी।हाँफती सी सपना जब अचानक ही राजीव और उसकी माँ के सामने पहुची तो वे आश्चर्य से राजीव को देखते रह गये।सपना को देख राजीव की मां की तो रुलाई ही फूट पड़ी,वे कुछ भी कहने की स्थिति में नही थी।राजीव भी भीगी आंखों से सपना को देखते देखते दूसरी ओर देखने लगा।सपना कुछ भी ना समझ सकी,राजीव की ऐसी हालत क्यो हो गयी?उसने राजीव की माँ को झकझोर कर पूछा मां जी बताओ ना राजीव को क्या हो गया है?इस बीच सपना ने अपनी मौसी की लड़की को वापस भेज दिया कि वह स्वयं आ जायेगी।राजीव ने वही पास में फ्लैट लिया हुआ था,वह उनके साथ ही उनके फ्लैट में चली गई।राजीव बिल्कुल मौन था।
फ्लैट पर पहुचने के बाद मां द्वारा पता लगा कि राजीव को ब्लड कैंसर हो गया है,इसका पता चलने पर ही उसने सपना से शादी को मना किया था।माँ ने बताया कि उसके इलाज के लिये ही हम एक वर्ष से दिल्ली आये हुए है।इलाज अभी एक वर्ष का बाकी है।तब तक हम यही रहेंगे।
अवाक सपना राजीव को एक टक देख रही थी,उस इंसान को जिसे वह दोमुहा समझ रही थी,वह उसके लिये ही उसके जीवन से निकल गया था,सब तोहमत अपने ऊपर लेकर।मां चाय बनाने के बहाने उनके पास से हट गयी। तब सपना बोली राजीव इतना बड़ा बोझ अपने सीने पर लिये रहे,चुपचाप,मैं पराई थी ना। स--प--ना बताओ तो जिसकी खुद की जिंदगी का भरोसा न था,वह तुम्हारी जिंदगी से कैसे खिलवाड़ करता?
तो सुन लो राजीव कल ही हम शादी कर रहे हैं मंदिर में,मैं रहूंगी तुम्हारे साथ,देखती हूँ भगवान कैसे तुम्हे मुझसे छीनते है?सपना,कहते कहते राजीव उससे चिपट कर फफक पड़ा, बिल्कुल एक मासूम से बच्चे की तरह।
राजीव विजित रहा,कैंसर को उसने पराजित कर दिया।सपना चट्टान की तरह राजीव के साथ डटी रही।मां कह रही थी मेरे राजीव को कुछ हो ही नही सकता था,उसके साथ सपना जो थी,सावित्री की तरह,यमराज क्या कर सकता था भला।
बालेश्वर गुप्ता,नोयडा
मौलिक एवं अप्रकाशित।
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