बेटा अनय और विदेशी बहू एमी के अमेरिका से आने के कारण एक महीने से सुधा जी काफी व्यस्त थीं।कहाँ तो एक साल से विदेशी लड़की से शादी के कारण बेटे -बहू से नाराज थीं और कहाँ आज उनके चले जाने से मायूस हैं!
सुधाजी के दिल में बेटा अनय की शादी के बड़े अरमान थे।उनका बेटा अनय देखने में जितना सुन्दर था उतना ही होनहार भी। उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गया और पढ़ाई पूरी करने पर अमेरिका में ही नौकरी करने लगा।सुधा जी के दिल में बेटा की शादी के लिए बहुत सारे अरमान थे।जब-तब वह अपनी मनपसंद बहू लाने के सपनों में खोईं रहतीं।एक दिन उनके अरमानों पर तुषारापात करते हुए बेटे अनय ने फोन पर कहा -" माँ! मैंने यहाँ अमेरिका में शादी कर ली है!"
अपने जज़्बातों को जज्ब करते हुए सुधा जी ने पूछा -" बेटा!शादी तो तुमने अपने पसंद की लड़की से कर ली है,परन्तु बहू तो भारतीय ही है न?"
बेटा अनय-" नहीं माँ!तुम्हारी बहू अमेरिकन है!"
यह सुनते ही सुधा जी के हाथों से फोन गिर पड़ा।वे लगभग अचेत-सी हो गईं।उनके पति सोहन जी ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा -" सुधा! अब जमाना बहुत बदल गया है।बेटे को अपने अनुसार जिन्दगी जीने दो।"
अमेरिकन बहू सुनकर सुधा जी को ऐसा सदमा लगा था कि एक साल तक उन्होंने बेटे -बहू से बात तक नहीं की।एक महीना पहले बेटा अनय अपनी पत्नी एमी को लेकर भारत आया था।एक-दो दिन तक तो सुधा जी अनमनी और नाराज-सी रहीं,परन्तु बहू एमी के रुप-रंग और व्यवहार को देखकर ज्यादा दिन तक नाराज नहीं रह सकीं।एक महीने में ही उन्होंने बेटा-बहू पर अपने प्यार और स्नेह का संचित भंडार लुटा दिया था।
आज बेटा-बहू के वापस लौटने पर उनकी आँखों के कोर अनायास ही भींगते ही जा रहें हैं।उनके पति उनकी मनःस्थिति से भलीभाँति अवगत हैं,फिर भी पत्नी के दिल को हल्का करने के इरादे से चुटकी लेते हुए कहा -"सुधा!विदेशी बहू के लिए इतना उदास क्यों होती हो?"
झट से आँसू पोंछते हुए सुधा जी ने कहा -" विदेशी है तो क्या हुआ?आखिरकार है तो हमारी इकलौती बहू ही न!"
सोहन जी ने मुस्कराते हुए कहा -"सुधा!अब मुझे समझ में आ गया है कि 'घी का लड्डू टेढ़ा भी भला' कहावत तुम्हारी सोच पर बिल्कुल सटीक बैठती है!"
पति की बातें सुनकर सुधा जी मुस्करा उठीं।
समाप्त।
लेखिका-डाॅक्टर संजु झा (स्वरचित)
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