"अरे प्रियंका, तुम्हारी शादी की सालगिरह तो आने ही वाली है और तुम्हारी सास अभी तक तुम्हारे घर पर नहीं आई हैं। सब ठीक तो है ना? ऐसे शुभ अवसर पर अपनों का आशीर्वाद बहुत ज़रूरी होता है। जिनके आशीर्वाद से तुम्हारा और विशाल का रिश्ता बना, उनकी कोई खबर ही नहीं मिलती," कमला जी अपनी बेटी प्रियंका से बोलीं।
प्रियंका ने हल्के स्वर में कहा, "माँ, अब क्या बताऊँ। उन्हें तो बेटी का घर ही अच्छा लगता है। यहां कितने दिन रहें? साल भर पहले पापा का देहांत हुआ, उसके बाद मुश्किल से छह महीने ठहरीं। उसके बाद लगातार वहां चली जाती थीं। अब तो आए दिन नहीं आतीं। मुझे क्या फर्क पड़ता, जहां उनकी इच्छा वहां रहें।"
कमला जी ने पूछा, "तो तुम दोनों के बीच सास-बहू के संबंध ठीक हैं ना? मुझे तो बहू का सुख भी कम लगता है। तुम्हारे भाई आकाश तो विदेश में रहते हैं, इसलिए उनके रहने का भी ध्यान रखना पड़ता है। साल में एक बार मिल जाएं, तो मेरे लिए इतना ही काफी है।"
प्रियंका ने मुस्कुराते हुए कहा, "माँ, आप तो आएंगी ना? आपके बिना तो यह उत्सव अधूरा ही रहेगा।"
कमला जी ने सहमति में सिर हिलाया, "हां-हां, क्यों नहीं आऊंगी। बस तुम अपनी सास का नंबर दे दो, मैं हाल-चाल पूछ लूँगी। कम से कम ये तो नहीं कहेंगी कि बेटी की मां ने कभी हाल-चाल पूछा।"
प्रियंका बोली, "ठीक है, आपको नीतू का नंबर देती हूँ।"
अगले दिन शाम को कमला जी ने नीतू को फोन किया। नीतू ने हँसते हुए कहा, "कैसी हैं आप? बहुत दिनों बाद बात हो रही है। आप फोन करें तो बहुत खुशी होगी।" फिर उसने फोन अपनी मां, ललिता जी को दे दिया।
कमला जी ने ललिता जी से कहा, "अरे बहू, आप तो हमें बिल्कुल भूल गईं। हर मां के लिए बेटी बहुत प्यारी होती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि बेटे-बहू को छोड़ दिया जाए। बड़े बुजुर्गों की देखभाल भी जरूरी है।"
ललिता जी ने गंभीर स्वर में कहा, "कमला जी, बड़ा भाग्य वाला होता है वह मां-बाप, जिन्हें बेटे-बहू का अपनापन मिलता है। अगर यह अपनापन नहीं मिलता, तो बुजुर्गों के लिए अपने बच्चों के घर में रहना बड़ा दुख बन जाता है।"
कमला जी थोड़ी हैरान हुईं, "क्या हुआ? प्रियंका और विशाल से कुछ गलत हुआ?"
ललिता जी ने धीरे से कहा, "यहां अपनापन नहीं मिला था। किसी भी मां के लिए बेटी का घर उनका अपना घर होता है, अगर वहां सम्मान न मिले, तो बेचारी मां कहाँ जाए?"
करीब एक हफ्ते बाद कमला जी ने यह सब अपने पति विनोद बाबू को बताया। विनोद बाबू बोले, "बहुत गलत बात है। जिस मां ने अपने बेटे को इतना प्यार और संस्कार दिया, उसे अपने ही घर में तंग होना पड़ा। हमें प्रियंका से बात करनी चाहिए।"
दो दिन बाद कमला जी ने प्रियंका को फोन किया और धीरे-धीरे सारी बात पूछी। प्रियंका ने पहले टालमटोल किया, फिर कहा, "माँ, वह हमारे हाथ का खाना नहीं खाती थीं, खुद बनाना चाहती थीं। सीढ़ियां चढ़ने में भी मुश्किल होती थी, इसलिए नीचे का कमरा दिया। जब कोई गेस्ट आता तो उनकी वजह से हम शर्मिंदा होते।"
कमला जी ने कहा, "तो सीधे बताओ, आखिर तुमने उनके साथ कैसा व्यवहार किया?"
प्रियंका ने कहा, "माँ, मेरी सहेलियां आई थीं, मेरी सास के कारण मजाक बना। मैंने उन्हें कह दिया कि पीछे सर्वेंट रूम खाली है, आप वहीं रह लीजिए। जब यह बात उनकी बेटी को पता चली, तो उन्होंने अपनी मां को घर ले लिया।"
कमला जी ने गंभीर स्वर में कहा, "प्रियंका, तुम्हें एहसास होना चाहिए। बेटा अपनी मां का दर्द देख सकता है, पर बहू भी अगर बुरा व्यवहार करे तो क्या सोचती होगी? तुम्हारे बच्चे भी देख रहे होंगे। तुम कल को सास बनोगी, बहू आएगी, तब तुम्हारी स्थिति कैसी होगी?"
प्रियंका ने नर्म स्वर में कहा, "माँ, अब समझ में आ रहा है। मैं अपने पुराने व्यवहार के लिए बहुत दुखी हूँ।"
वहीं विशाल ने अपनी मां ललिता जी से फोन पर बात की। ललिता जी ने बेटे को आशीर्वाद दिया और कहा, "तुम्हारी सास का फोन आया था। मैंने तुम लोगों के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा।"
विशाल ने कहा, "मैं अभागा हूं जो मां का ख्याल नहीं रख सका। दिखावे की खुशियाँ तो बहुत खरीदी, पर मां की ममता से वंचित रह गया।"
प्रियंका ने भी फोन उठाया और माफी मांगी, "मम्मी जी, मैं सच में दुखी हूँ। कृपया हमें आशीर्वाद दें।"
ललिता जी ने मुस्कुराते हुए कहा, "सदा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है। सालगिरह पर मैं आऊंगी, लेकिन वही घर में रहूँगी जहाँ सम्मान मिला। अपने सम्मान को बार-बार दांव पर नहीं लगाना चाहिए।"
जब कमला जी को पता चला कि ललिता जी आ रही हैं, तो वे भी बेटी-दामाद को आशीर्वाद देने सालगिरह पर पहुंचीं। ललिता जी दो दिन रही, फिर जाने लगीं, लेकिन प्रियंका और विशाल ने उन्हें रुकने के लिए बहुत आग्रह किया।
ललिता जी ने कहा, "अगर मैं रुक गई तो अपने साथ न्याय नहीं कर पाऊंगी। वक्त मिले तो आप मिलने आना, मैं भी आती रहूंगी।"
इतना कहकर वे अपने घर लौट गईं, पर परिवार में अपनापन और सम्मान की याद हमेशा बना रही।
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