महीने का आखिरी रविवार अर्थात किटी पार्टी का दिन।श्रीमती यादव के यहाँ कम से कम बीस से पच्चीस महिलाएं जमा थीं।
तरह तरह का नाश्ता और जूस उपलब्ध था। कई तरह के गेम्स भी खेले जा रहे थे।
एक प्रश्न गूँजा, "हू इज़ योर फेवरीट वुमन? "
आशा के विपरीत एक उत्तर आया, " मेरी मदर इन लॉ "
यह आवाज़ थी श्रीमती कौशल की।
कुछ ने ठहाका लगाया वहीं कुछ महिलाओं की आँखें आश्चर्य से दोगुनी बड़ी हो गईं। वे श्रीमती कौशल के इस कथन को पचा नहीं पा रहीं थीं।
इस बात श्रीमती कौशल संजीदा हो गईं। हाँ, मेरी सासु माँ मेरी पसंदीदा महिला हैं। ज़ब मेरा बेबी इस दुनिया में आया मेरी माँ बहुत दूरी पर नहीं थीं पर फिर भी कुछ परिस्थितियों के चलते मेरे पास नहीं आ सकी लेकिन मेरी सासु माँ पूरे समय मेरे साथ रहीं। मेरा दर्द उनका दर्द था।
" मेरी माँ ने मुझे एक छोटा पौधा बनाया, सासु माँ ने मुझे विशाल वृक्ष बनाया। माँ ने सुख में जीना सिखाया, सासु माँ ने दुख में भी ख़ुशी से जीना सिखाया।"
सन्नाटा छाया रहा तीस सेकंड तक। अचानक तालियाँ बजने लगीं और अगले एक मिनट तक बजती रहीं।
थैंक यू फ्रेंड्स! मेरी सासु माँ वह बैंक हैं जहाँ मेरे लिए खुशियाँ क्रेडिट होती हैं और परेशानियां डेबिट होती हैं।
तालियां अभी भी बज रहीं थीं।
ज्योति अप्रतिम
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