'मां... मां...तेज़ी से दौड़ती हुई शीना रोती बिलखती घर में घुसी...
आंसुओ से भरीं आँखें एकदम लाल और पलकें सूज गयीं थी बिखरे बाल,जगह जगह से फटे हुए कपड़े...
उसकी ये हालात देख हक्की बक्की रह गयी सविता.. और बदहवास सी उसे हिला कर पूछने लगी..
क.. क... क... क्या हुआ शी... शी...शीनू
'वो आफिस में बॉस ने...
'क्या किया बॉस ने...
उसे झिंझोड़ कर सविता ने पूछा...
'मेरे साथ....मेरे साथ....जबरदस्ती करने की कोशिश की
क्या....सर पर हाथ रख धम्म से जमीन पर बैठ गयी सविता...पलकों के किनोरों से अश्रुधार बह निकली
पर......पर....पर...मां..... मैं उसके सिर पर फूलदान मार कर भाग निकली...
ये सुन कुछ राहत की सांस ली सविता ने पर एक गम्भीर चिंता से घिर उठी और बोली..
'तू चल पहले पुलिस रिपोर्ट करवा कर आते है...
अपने और शीना के आँसू पोछ और उसे एक दुप्पटे से ढँक कर अपने साथ ले सविता जब बाहर निकली तो पूरी सोसाइटी के लोग जमा होकर उसके बारे में खुसुर पुसुर करने लगे...
'इसका तो चाल-चलन शुरू से ही अच्छा नहीं था।
छोटे छोटे कपडे पहन कर इस तरह आमंत्रण देती हुई बाहर निकलेगी तो यही होगा ना....
ये बोलने वाली महिला की तरफ मुखातिब होते हुए सविता बोली"क्यों मिसेज सिन्हा सुना है पिछले साल आपके घर एक बदमाश घुस आया और आपके साथ छेड़छाड़ करने लगा तो क्या आपने भी उसे आमंत्रण ही दिया था...
बाहर निकलती हमारी इन बेटियो के उभारो पर.....
यहा वहां से झांकते उनके शरीर पर,गंदी निगाहें तो आप लोग डालो...उन्हें हॉट...सेक्सी...माल और जाने क्या क्या कहो...मौका मिलने पर उन्हें नोंच डालो...
पर दोषी कौन...
हमारी बेटिया और उनके कपड़े...
अरे इससे अच्छा तो वो आदिवासी समाज है जिसमें नग्न रहने के बावजूद महिलाओं का बलात्कार नहीं होता बल्कि बेटियों के जन्म की खुशी मनायी जाती है...
ये सब सुन वो सब अनगिनत निगाहे जो शीना को भेद रही थी अब एक एक करके ज़मीन पर झुकने लगी...
और सविता चल दी शीना को लिए पुलिस स्टेशन....
अपने स्वाभिमान अपने आत्मसम्मान की सुरक्षा के लिए
अनिल जैन
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