बारिश, गोलगप्पे और रिश्तों की गर्माहट**

 कमरे की खिड़की से टकराती बारिश की बूंदें एक अजीब सा सुकून दे रही थीं, लेकिन काव्या के मन में एक अजीब सी बेचैनी छाई हुई थी। उसने मेज पर रखे कॉफी के मग को उठाया जो अब पूरी तरह से ठंडा हो चुका था। सामने कुर्सी पर उसका पति, अनिरुद्ध, पिछले चार घंटों से अपने लैपटॉप की स्क्रीन में आँखें गड़ाए हुए था। कीबोर्ड पर चलती उसकी उँगलियों की खट-खट की आवाज़ के अलावा उस कमरे में कोई और संवाद नहीं था। काव्या ने एक गहरी सांस ली और बिना कुछ कहे कमरे से बाहर निकल आई। शादी को अभी आठ महीने ही हुए थे, लेकिन उसे लगने लगा था जैसे वह किसी इंसान से नहीं, बल्कि एक मशीन से ब्याही गई है। 


वह सीधे अपने ससुर, रिटायर्ड प्रोफेसर शिवनाथ जी के कमरे में गई। बाबूजी अपनी आराम कुर्सी पर बैठकर मुंशी प्रेमचंद की कोई किताब पढ़ रहे थे। काव्या को दरवाजे पर खड़ा देख उन्होंने अपना चश्मा माथे पर सरकाया और मुस्कुराते हुए बोले, "आओ बेटा, क्या बात है? आज मेरी बेटी का चेहरा इस बारिश के मौसम में भी इतना उतरा हुआ क्यों है?"


काव्या ने जाकर उनके पास एक स्टूल खींच लिया और थोड़ा नाटकीय अंदाज में मुंह बनाते हुए बोली, "बाबूजी, मैं आपके इस होनहार बेटे के खिलाफ आपके कोर्ट में मुकदमा दायर करना चाहती हूँ। मुझे इंसाफ चाहिए! शादी को आठ महीने हो गए हैं, लेकिन आपके इस नवाबजादे ने आज तक मुझे सड़क किनारे खड़े होकर गोलगप्पे नहीं खिलाए हैं। जब देखो बस ऑफिस की मीटिंग्स, क्लाइंट्स और ई-मेल्स। क्या कोई इंसान अपनी फाइलों और एक्सेल शीट्स से इतना प्यार कर सकता है कि उसे याद ही न रहे कि उसकी एक पत्नी भी है, जिसे बारिश में उसके साथ एक कप चाय पीने या ठेले पर चाट खाने का मन करता है?"


बाबूजी अपनी बहू की इस मासूम और प्यारी सी शिकायत को सुनकर जोर से ठहाका मारकर हंस पड़े। उनके हंसने से काव्या के चेहरे पर भी एक हल्की सी मुस्कान तैर गई। बाबूजी ने किताब मेज पर रखी और अपनी सफेद दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए बोले, "बेटा काव्या, तुम्हारी यह दलील अगर आज से कुछ सौ साल पहले किसी प्राचीन यूरोपीय सभ्यता में दी गई होती, तो यह एक बहुत बड़ा अपराध माना जाता। कुछ पुरानी सभ्यताओं में तो पति का अपनी पत्नी की ऐसी छोटी-छोटी इच्छाओं और खुशियों को नजरअंदाज करना, उसे उसके पसंदीदा पकवान न खिलाना, एक दंडनीय अपराध था। लेकिन अफसोस, मेरे बच्चे, आज के इस आधुनिक और कॉरपोरेट युग में ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी वर्कहोलिक पति को सजा दे सके।"


काव्या ने एक लंबी सांस छोड़ी और उदास स्वर में कहा, "तो क्या मेरी किस्मत में जीवन भर इस लैपटॉप सौतन के साथ ही रहना लिखा है?"


बाबूजी ने प्यार से काव्या के सिर पर हाथ रखा और बोले, "बिल्कुल नहीं! मैं कोई असली जज तो नहीं हूँ, लेकिन इस घर का मुखिया होने के नाते एक फैसला जरूर सुना सकता हूँ। इस वीकेंड की सजा के तौर पर मैं तुम दोनों के लिए डलहौजी का एक शानदार हॉलिडे पैकेज बुक कर रहा हूँ। पहाड़ की ठंडी हवाएं और देवदार के पेड़ अनिरुद्ध के दिमाग से इस ऑफिस के भूत को जरूर उतार देंगे। तुम जाकर अपने लिए कुछ अच्छे और गर्म कपड़े पैक करना शुरू करो। और हाँ, इस सरप्राइज के बारे में उस लैपटॉप के दीवाने को आज रात ही बता देना। कल शुक्रवार है, उसके बॉस से छुट्टी की बात मैं खुद फोन करके कर लूंगा। मेरा एक पुराना छात्र है उसका बॉस, मेरी बात नहीं टालेगा।"


काव्या अभी कुछ बोलने ही वाली थी कि दरवाजे पर एक हल्की सी आहट हुई। दोनों ने मुड़कर देखा तो अनिरुद्ध दरवाजे की चौखट पर सिर झुकाए खड़ा था। उसके हाथ में उसका लैपटॉप नहीं, बल्कि काव्या की वो मनपसंद शॉल थी जो वह अक्सर बारिश के दिनों में ओढ़ती थी। 


अनिरुद्ध के चेहरे पर एक गहरा पछतावा था। वह धीरे से कमरे के अंदर आया और काव्या के कंधों पर शॉल डालते हुए बाबूजी से बोला, "पिताजी, आपको मेरे बॉस को फोन करने या सिफारिश लगाने की कोई जरूरत नहीं है।"


काव्या ने हैरानी से अनिरुद्ध की तरफ देखा। अनिरुद्ध ने बाबूजी के सामने हाथ जोड़ते हुए कहना शुरू किया, "मैं जाने कब से दरवाजे पर खड़ा आप दोनों की बातें सुन रहा था। मुझे सच में अंदाजा नहीं था कि अपने करियर और हमारे भविष्य को सुरक्षित करने की इस अंधी दौड़ में, मैं अपने वर्तमान की सबसे बड़ी खुशी को ही खोता जा रहा हूँ। काव्या की शिकायत सौ प्रतिशत सही है। मैं एक बहुत बुरा पति साबित हुआ हूँ। भविष्य संवारने के चक्कर में मैंने इसके आज को उदास कर दिया है।"


अनिरुद्ध काव्या की तरफ मुड़ा, उसकी आँखों में एक सच्ची नमी थी। "काव्या, मुझे माफ कर दो। मुझे तुम्हारी छोटी-छोटी खुशियों का ध्यान रखना चाहिए था। मैंने अभी-अभी अपने बॉस को ईमेल और मैसेज दोनों कर दिए हैं कि मैं अगले एक हफ्ते के लिए किसी भी काम के लिए उपलब्ध नहीं रहूंगा।"


बाबूजी मुस्कुरा दिए, "चलो, देर आए दुरुस्त आए। तो डलहौजी की पैकिंग शुरू की जाए?"


अनिरुद्ध ने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निकाला और मुस्कुराते हुए बोला, "पिताजी, पैकिंग तो करनी है, लेकिन दो लोगों की नहीं, बल्कि तीन लोगों की। मैंने अभी-अभी डलहौजी के लिए तीन फ्लाइट टिकट्स और रिसॉर्ट बुक किए हैं। आप भी हमारे साथ इस ट्रिप पर चल रहे हैं।"


बाबूजी थोड़ा झिझकते हुए बोले, "अरे बेटा! मैं बूढ़ा इंसान तुम दोनों के इस ट्रिप में कबाब में हड्डी बनकर क्या करूंगा? तुम दोनों जाओ, एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताओ। मुझे यहीं घर पर आराम करने दो।"


बाबूजी की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि काव्या ने उनका हाथ पकड़ लिया और प्यार भरे लेकिन सख्त लहजे में बोली, "बाबूजी, आप कोई दलील मत दीजिए, क्योंकि आपके इस कोर्ट में अब मेरी चलेगी। आप हमारे रिश्ते की हड्डी नहीं, बल्कि वो मजबूत नींव हैं जिसने आज इस दरकते हुए रिश्ते को संभाल लिया। आप नहीं जाएंगे तो यह ट्रिप कैंसल समझिए। और वैसे भी, वहां के पहाड़ों में मेरे साथ गोलगप्पे खाने के लिए मुझे एक साथी तो चाहिए ही।"


अनिरुद्ध और बाबूजी दोनों काव्या की इस बात पर मुस्कुरा उठे। घर का माहौल जो कुछ देर पहले तक तनावपूर्ण था, अब पूरी तरह से बदल चुका था। 


तभी घर की डोरबेल बजी। अनिरुद्ध ने जाकर दरवाजा खोला। बाहर तेज बारिश हो रही थी और एक डिलीवरी बॉय बारिश से भीगता हुआ एक बड़ा सा पैकेट लेकर खड़ा था। अनिरुद्ध वह पैकेट लेकर अंदर आया और उसे डाइनिंग टेबल पर रख दिया। 


"यह क्या है?" काव्या ने हैरानी से पूछा।


अनिरुद्ध ने पैकेट खोलते हुए एक बड़ी सी मुस्कान के साथ कहा, "शुरुआत डलहौजी से नहीं, बल्कि यहीं से करते हैं।" पैकेट के अंदर शहर के सबसे मशहूर चाट वाले के तीखे गोलगप्पे, मीठी चटनी, और गरमागरम टिक्की थी। 


बाबूजी, काव्या और अनिरुद्ध तीनों डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। बाहर बारिश की तेज़ बूंदें अभी भी गिर रही थीं, लेकिन घर के अंदर रिश्तों की एक नई और मीठी गर्माहट पनप चुकी थी। तीखे गोलगप्पे खाते हुए तीनों डलहौजी के ट्रिप की पैकिंग के बारे में चर्चा करने लगे। काव्या को अब अपना पति एक मशीन नहीं, बल्कि वो ही प्यार करने वाला इंसान लग रहा था, जिसके साथ उसने पूरी ज़िंदगी बिताने का सपना देखा था।


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क्या आपने भी कभी महसूस किया है कि काम के दबाव में आपने अपनों को समय देना कम कर दिया है? या फिर परिवार के किसी बड़े-बुजुर्ग ने आपके उलझे हुए रिश्ते को अपने प्यार से सुलझाया है? अपने अनुभव और इस कहानी के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में हमारे साथ जरूर साझा करें।


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