फर्ज

 ये क्या है मोहनजी....

आप अस्पताल से लौटते है कुछ वक्त के लिए और फिर अस्पताल लौट जाते हो ...

और वापस आकर भी खुद को अलग कमरे मे रहते हो......ना साथ बातचीत ना खाना .....क्या सब जिम्मेदारी आपकी अस्पताल और मरीजों के लिए ही है मेरी और आराध्या के प्रति भी कोई आप की जिम्मेदारी नही है ...मोहन के अस्पताल से लौटने पर पत्नी सुधा गुस्से मे बोली ...

इससे पहले मोहन कुछ कहता बेटी आराध्या बोली-मम्मा.. ..आप भी ऐसी बातें करोगी तो कैसे चलेगा .....पापा अपने फर्ज को पूरा कर रहे है वह एक डाक्टर है लोगों की जान बचाना उनका इलाज करना उनका फर्ज है ...

अब तुम मुझे बताओगी क्या सही क्या गलत ...

जानती भी हो ये "कोरोना " एक ऐसी बीमारी है जो ....

कहीं दूसरों को बचाते इन्हें हो गई ये गंभीर बीमारी हो गई तो...

हमारा क्या होगा ...कहते सुधा रोने लगी...

सुधा ...क्या यार तुम भी ....रूको ....मोहन तबतक हाथों को धोकर आते बोला ...

सुधा ...हम डाक्टर है हमारी जिम्मेदारी है लोगों का इलाज करना ...और जागरूक करना ....

और यदि हम भी डरकर घर बैठ जाएंगे तो कैसे इस रोग का सामना करेंगे ...और अकेले मे नही सभी डाक्टर नर्स ..वार्ड ब्वाय ...सफाईकर्मी ...सभी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे है जैसे बोर्डर पर फौजी अपने देश की सुरक्षा मे रहते है...और सुधा एकबार ये सोचो ...यदि तुम्हारा पति मोहन डाक्टर ना होता और भगवान ना करे हमारे परिवार मे किसी को ये रोग होता....

तो कैसे उसे बचाओगी बोलो ....घर मे ...

मे वापसी आकर तुमसे दूर सिर्फ इसलिए हूं ताकि वायरस ना फैले ...और तुम और आराध्या मुझे सुरक्षित देख सको ....भले ही दूर से .....

तभी आराध्या बीच मे बोली -पापा देखना मे भी आपके जैसे डाक्टर बनूंगी ...और आप यहां की चिंता मत करो..मै हूं ना ...

हां तू बहुत बडी डाक्टर है ना ...

हूं ...और नही तो क्या बडी होकर जरुर बनूंगी ...

और उसके लिए आपके प्यार की बहुत जरूरत पडेगी ...

चलो अब एक बहादुर पत्नी बनकर पापा को अस्पताल जाने के लिए बाय करो मुस्कुराते हुए ....

सुधा ने एकबार आराध्या को देखा फिर मुसकराते मोहन को अस्पताल जाने को विदा किया....दोस्तों आपके दोस्त बृजमोहन ने आज ये पोस्ट ऐसे सभी स्वास्थ्य कर्मियों ,डाक्टर नर्स , सफाई कर्मचारियों .....और ऐसी आपतकालीन स्थिति मे समान डिलीवरी करते कर्मचारियों ...एंव सबसे महत्वपूर्ण पुलिसकर्मियों और फौजी भाइयों के सम्मान मे प्रस्तुत की है ...जैसे हम सभी ने तालियां घंटी थालियों को बजाकर इनका सम्मान किया है वैसे ही भविष्य मे भी हमें इनका सदैव सम्मान करना है ..

आपका दोस्त

अनिल जैन


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