सुमन ने अपना बैग लिया और तेजी से बाहर दरवाजे की और चल पडी ......
आँखो मे आँसुओं की धारा थी मगर वो उन्हें बहने से रोक रही थी ....मन बेहद उदास था वो घर जिसमें वो शादी करके आई थी आज उसके लिए पराया हो रहा था ...एक एक समान ...एक एक दीवार जिसे उसने हाथों से सजाया था उससे जुदा हो रहा था ......
बाहर गेट तक पहुंची ही थी की पीछे से उसके पति अनिल की आवाज़ आई , रुको...ये तुम्हारा समान रह गया ...ये भी लेकर जाओ.....
पीछे पलटकर देखा तो अनिल एकदम शांत था उसके चेहरे पर कोई भाव नही था ...जैसे उसे सुमन के जाने का कोई दुख ...कोई शिकन नही थी...
समान रखकर गाडी मे बैठी और अपने से दूर होते अपने घर अपने पति ...अपने जीवनसाथी को बहुत दूर होते देख रही थी ...गाडी मे खूब रोई .....
और मायके तक गाडी पहुंचने तक लगातार रोती रही ...
कल रात फिर से उसका झगड़ा हुआ था अनिल से ...
अक्सर पहले भी होता था झगड़ा कभी छोटा तो कभी बडा ...मगर वो दोनों एकदूसरे को बाद मे मना लेते थे ..
मगर कल रात ....बहुत कहासुनी हो गई ...कल सुमन का जन्मदिन था और वादा किया था अनिल ने उसे बाहर डिनर का ....वो तैयार होकर इंतजार कर रही थी मगर वो आया ही इतना लेट की ....उसकी बिना सुने उसपर बरस पडी और बात इतनी बड़ी की वो बोल पडी ...चली जाएगी वो उसे छोडकर हमेशा को ...और अनिल ने भी गुस्से मे कहा-जाओ ...चली जाओ ....
बस फिर क्या ...समान बैग सब तैयार और ......
सुमन.....सुमन ....अब उठ भी जाओ ....
सुमन ने देखा सामने अनिल खडा था काफी लिए ....
उसे आलिंगन मे लेते बोला-यार ...एक अर्जेंट मींटिंग बुला दी बाँस ने और ....मगर मैने आज की फुल डे छुट्टी ली है ....आज ये बंदा अपनी बीबी की सेवा मे हाजिर है जहां चलना हो हाजिर है मूवी डिनर ...शांपिंग ....
सुमन बडे गौर से कभी अमन को कभी खुद को देख रही थी ....तो क्या वो सपना था ....छी कितना भयानक सपना था ...
तभी उसकी तंद्रा को तोड़ते हुए अमन बोला-यार ...रात गई बात गई ....अच्छा बाबा सौरी ....माफ कर दो ना ...हम दोनों पति पत्नी ही तो एकदूसरे के पूरक है और ये नौकझोक छोटे छोटे से झगड़े ...जब बूढे हो जाएंगे ना तब याद करके कभी हंसेंगे कभी रोएगे ...
सुमन ने अनिल को कहा-गलती आपकी नही मेरी थी फिर आप क्यो ....मुझे सुनना भी तो ....
बस ....बस...भूल जाओ ...कहा ना रात गई ....
बात गई ...सुमन ने मुसकराते पति के होठों पर अंगुली रखते हुए कहा ....
अब दोनों एकदूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे
घर पर रहे सुरक्षित रहे मित्रो को भी भेजे समय व्यतीत हो जाऐगा
अनिल जैन
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