बहू भी तो बेटी ही है

 रात घरेलू नौकर को बुखार था  सो वह काम नही कर पाएगा इसलिए रात अलार्म लगा कर सोना पड़ा....

सुबह पाँच बज़े उठकर नाश्ते और दोपहर का लंच तैयार किया ...

नौकर को चाय बनाकर पिलाई , और हाल चाल पूछ कर आई तो बहू रानी सुधा फाॅयल पेपर गैस के पास पत्थर पर रखकर चपातियाँ पैक कर रही थी...

" सुधा बिटिया .... फाॅयल पेपर प्लेट में रख लेना था ...

बहू ने चपातियाँ वापिस होटकेस में रखी और सैंडिल पहनकर चलती बनी ...ये देख कर सुषमा जी को बड़ा बुरा लगा

नौकरी करतीं है...

वेतन अपने पास रखती है ...

महारानी को कभी नहीं जगाया फिर भी इतने नखरे... मैं तो दिन भर दस काम इनके करती हूँ आज खुद की रोटी पैक करनी पड़ गई तो इतना गुस्सा मन मन में बड़बड़ाने लगी।

सबने नाश्ता किया तो, सुषमा जी ने मन से नाश्ते को नहीं किया , बहू भूखी चली गई ...

" बेटा अनिल... फैक्ट्री जाने से पहले  बहु का लंच बॉक्स देकर आजा...

" क्यों... वह भूल गई क्या ...

" आज शायद लेट हो रही थी भूखी चली गई है लंच बॉक्स भी नहीं लेकर गई

बाहर का खाना खाकर उसका पेट खराब हो जाएगा...

" ओह...ठीक है ,दे आता हूँ , मम्मी जी

" अच्छा जी... उसके लिए पनीर की भुजिया भी बना दी ...

पूरी , रायता फल ,सलाद भी...

" बेटा अनिल जब तुम्हारी बहन रुठती थी तो मैं उसके लिए भी स्पेशल बना कर भेजती थी...

उसका सारा गुस्सा प्यार में बदल जाता था ... बहू भी तो बेटी ही है, मेरी बात का बुरा मान गई तो उसको एहसास तो मुझे ही कराना पड़ेगा कि मुझे उसकी कितनी फ़िक्र है ,उसका कितना प्यार है । यदि मैं टोका-टाकी करती हूँ तो चिंता वश ही करती हूँ...सुषमा जी बोली..

" हूँअ .... आप ही सिर चढ़ा रही हैं

" अधिक देर की भूख और उपेक्षा नफ़रत को जन्म देती है इसलिए अब जल्दी दौड़ ...

तब तक तुम्हारा भी लंचबॉक्स तैयार कर देती हूँ

शाम को बहू सुधा ने आते ही कहा ," साॅरी.... मम्मी जी मैंने आपको बिना वजह परेशान किया ...

ना जाने मुझे क्यों गुस्सा आया हुआ था दरअसल नौकर के कारण हमारी काम करने की आदत छूट गई है जब कुछ करना पड़ता है तो...

" पर बिटिया ...खाने से नहीं रूठना चाहिए ...कहकर सुषमा जी ने सुधा गले से लगा लिया ...

वहीं सुधा बार बार रोते हुए अपनी सुबह वाली हरकत पर क्षमा मांगती रही...  

अनिल जैन


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